हरिद्वार से कानपुर के बीच रोजाना 583 करोड़ लीटर हानिकारक कचरा गंगा में गिर रहा है। यह रिपोर्ट जल निगम और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के सामने रखी। रिपोर्ट में बताया गया है कि 33 बड़े नालों से यह कचरा गंगा में बेरोक-टोक जा रहा है। इतने हानिकारक तत्व गंगा में जाने से रोकने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं किए जाने पर एनजीटी ने जल निगम, सीपीसीबी, यूपीसीबी (उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), गंगा बेसिन अथॉरिटी के अधिकारियों को तलब किया है।
16 नवंबर को इस मसले पर फिर से सुनवाई की जाएगी। पिछले दिनों एनजीटी की सुनवाई में विभागों से पूछा गया था कि गंगा में कितने नालों से कितना कचरा गिरता है तो सभी विभागों ने अलग-अलग आंकड़े दिए थे। ट्रिब्यूनल ने इसे हास्यास्पद मानते हुए नए सिरे से सर्वे करने को कहा था। अब सभी विभागों ने मिलकर एक संयुक्त सर्वे हरिद्वार से कानपुर के बीच किया। इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगा में कुल 33 नाले सीधे गिरते हैं। इसके अलावा 20 नालों से कचरा काली नदी, रामगंगा नदी के जरिये गंगा में पहुंच रहा है।
अकेले पांडु नदी से रोजाना 52.7 करोड़ लीटर कचरा गंगा में जा रहा है। एनजीटी ने इस रिपोर्ट को काफी भयावह बताया है। कहा है कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इतने लंबे समय से काम चल रहा है, इसके बावजूद यह स्थिति कैसे है। इसकी जानकारी देने के लिए विभागीय अधिकारियों को तलब किया गया है।