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खास खबर: सेना जहां चाहेगी…वहां पहुंचाएंगी सैन्य साजोसामान, CAD की तकनीक ट्रांसफर करने के लिए ADRI ने दी मंजूरी

Tue, 04 Mar 2025 10:53 AM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जीआईएल ने हाल ही में सेना की ओर से मिले तीन टन भार ले जाने में सक्षम पी-3 हैवी ड्रॉप पैराशूट का बड़ा ऑर्डर पूरा किया है। इसके जरिए तीन टन सामान सरहद या अन्य स्थानों पर भेजा जा सकेगा। इस पैराशूट सिस्टम को एएन 32 विमान के जरिये इस्तेमाल में लाया जाता है।
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सीएमडी, जीआईएल एमसी बालासुब्रमणियम - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आने वाले समय में सेना सैन्य साजोसामान को आसानी से इधर-उधर कर सकेगी। कानपुर की ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल) खास तरह के कंट्रोल्ड सप्लाई ड्रॉप पैराशूट बनाएगी। कंट्रोल एरियल डिलीवरी सिस्टम (सीएडी) की तकनीक ट्रांसफर करने के लिए एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) ने मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसका उत्पादन शुरू हो सकेगा।

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इस पैराशूट के जरिए सेना 500 किलो ग्राम से लेकर एक टन भार तक का सामान एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर सकेगी। एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के सहयोग से अब ऐसा सप्लाई ड्रॉप सिस्टम तैयार करने पर काम किया जा रहा है, जिससे किसी भी स्थिति में हथियार या रसद एक से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जा सके। अभी तक इस तरह का सप्लाई ड्रॉप सिस्टम देश में नहीं है।
जमीन पर आसानी से उतारा जा सकेगा सामान
कंट्रोल एरियल डिलीवरी सिस्टम (सीएडी) के जरिए सेना को और मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा। पैराशूट में गाइडेड सिस्टम लगा होगा, जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकेगा। रिमोट के जरिये ही सामान को उतारा जा सकेगा। अभी सेना अलग-अलग विमानों के जरिए हवा के रूख के आधार पर सामान की आपूर्ति करती रही है। कंट्रोल सिस्टम होने से सामान सुरक्षित रहेगा और इसको ट्रैक भी किया जा सकेगा। सामान जमीन पर आसानी से उतारा जा सकेगा।

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पी -3 पैराशूट का सेना का बड़ा ऑर्डर किया पूरा
जीआईएल ने हाल ही में सेना की ओर से मिले तीन टन भार ले जाने में सक्षम पी-3 हैवी ड्रॉप पैराशूट का बड़ा ऑर्डर पूरा किया है। इसके जरिए तीन टन सामान सरहद या अन्य स्थानों पर भेजा जा सकेगा। इस पैराशूट सिस्टम को एएन 32 विमान के जरिये इस्तेमाल में लाया जाता है। वहीं पी-7 हैवी ड्राॅप पैराशूट सिस्टम का बल्क प्रोडक्शन क्लीयरेंस (बीपीसी) पहले ही मिल चुका है। इस पैराशूट सिस्टम को आईएल-76 एयरक्राफ्ट के जरिये दुर्गम क्षेत्रों में सात टन भार के उपकरणों एवं वाहनों को उतारने में उपयोग में लाया जाता है।

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भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय के निर्देशन में रक्षा मंत्रालय की डीपीएसयू (जीआईएल) आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के तहत आगे बढ़ रही है। कंट्रोल एरियल डिलीवरी सिस्टम (सीएडी) की तकनीक ट्रांसफर करने के लिए एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) ने मंजूरी दे दी है। जीआईएल खास तरह के कंट्रोल्ड सप्लाई ड्रॉप पैराशूट को आने वाले समय में बनाएगी। इसके जरिये 500 किलोग्राम से एक टन भार तक के सैन्य साजोसामान को पहुंचाया जा सकेगा।  -अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), जीआईएल एमसी बालासुब्रमणियम
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