कल्याणपुर के पास सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होती मेट्रो के पिलर की पाइलिंग
पटरी से उतरा मेट्रो का काम, 1200 में 1015 श्रमिक घर गए
- 185 श्रमिकों के साथ ही कछुआ गति से चल रहा काम
- लॉकडाउन तीसरे चरण के खत्म होने से पहले घरों को लौटने लगे थे मजदूर
आदर्श त्रिपाठी
कानपुर। लॉकडाउन से पहले हाईस्पीड में दौड़ रहा आईआईटी से मोतीझील तक ट्रैक बिछाने और स्टेशन निर्माण का काम अब पटरी से उतर गया है। इसकी वजह बनी है श्रमिकों की घर वापसी। बीते साल नवंबर में करीब 1200 श्रमिकों के साथ मेट्रो परियोजना का काम शुरू हुआ था। लॉकडाउन का तीसरा चरण खत्म (17 मई) होने से पहले ही श्रमिक अपने घरों को लौटने लगे। अब हालत यह है कि 185 श्रमिक ही बचे हैं। इन्हीं के जरिए कछुआ गति से काम चल रहा है।
आईआईटी से लेकर मोतीझील तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन निर्माण की जिम्मेदारी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को दी गई है। कंपनी से जुड़े ज्यादातर श्रमिक बिहार, ओडिशा और प. बंगाल के रहने वाले हैं। ये श्रमिक मेट्रो यार्ड व डिपो में रहते थे। लॉकडाउन के तीसरे चरण में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम शुरू करने की अनुमति मिली तो थोड़ा बहुत काम शुरू कराया गया। हालांकि कई श्रमिक खाली बैठे रहे। यूपीएलएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक 13 मई के आसपास से श्रमिक अपने घरों को रवाना होने लगे। वर्तमान में जीटी रोड पर कल्याणपुर के पास, विश्वविद्यालय से आगे और गुरुदेव चौराहा के पास तीन जगह दो-दो पिलर की पाइलिंग कराई जा रही है। कानपुर मेट्रो परियोजना का काम काफी पिछड़ गया है। अब श्रमिकों की वापसी होने के बाद ही काम में तेजी आएगी।
श्रमिकों के लिए नमूने
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेट्रो के काम से जुड़े श्रमिकों के नमूने लिए हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रैंडम आधार पर सैंपल लिए हैं।