बेटी के हाथ पीले करने के सपने पैसों की तंगी से पूरे न कर पाने वाले पिता की झोली अचानक फरिश्ता बनकर आए युवकों ने भर दी। इन युवकों ने पुरोहित पिता की बेटी को न केवल मुंहबोली बहन बनाया, बल्कि 15 युवकों की टीम ने 60 हजार रुपये भी जुटाए। बृहस्पतिवार शाम जालौन के ममता गेस्ट हाउस में जब शहनाई बजी तो पुरोहित की आंखों से आंसुओं के सैलाब के साथ ही मुंह से आशीर्वाद के झरने भी फूटे।
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शादी
- फोटो : अमर उजाला
बात हो रही है यूपी के जालौन जिले में कोतवाली क्षेत्र के लौना रोड मोहल्ले में रहने वाले अशोक द्विवेदी की। पुरोहिती करने वाले अशोक द्विवेदी की तीन बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटे 12 से 13 साल के हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पुरोहिती से गुजर-बसर चलती है। गोसंरक्षा से जुड़े ओमकार ठाकुर ने बताया कि करीब 15 दिन पहले वह अपने साथी रघुराज सिंह के साथ परचून की दुकान पर खड़े थे। अशोक द्विवेदी दुकानदार से बड़ी बेटी प्रिया की शादी की चर्चा कर रहे थे। कह रहे थे कि किसी तरह शादी तो तय कर दी, पर रुपयों की कमी ने समस्या खड़ी कर दी है।
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शादी
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर ने बताया कि पुरोहित ने दुकानदार से यहां तक कहा कि अगर बारात दरवाजे पर आ गई तो डूब मरने के सिवा और कोई रास्ता न बचेगा। यह कहते-कहते पुरोहित फफक पड़े। बस उसी पल ठाकुर के दिल में आया कि अपने दोस्तों संग अपनी मुंहबोली बहन की शादी का जिम्मा वे लोग उठाएंगे और उन्होंने पुरोहित के कंधे पर हाथ रखकर शादी की जिम्मेदारी का वचन दे दिया।
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शादी
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बृहस्पतिवार को प्रिया की बारात आई और घोड़ी पर बैठे दूल्हे रविंद्र को उतारने के लिए एक दो नहीं, बल्कि प्रिया के दस-पंद्रह भाइयों के हाथ आगे बढ़े। शुक्रवार को विदाई के वक्त भी प्रिया और उसका पूरा परिवार इन युवाओं को बार-बार दुआएं दे रहा था। युवाओं ने शादी में तमाम उपहार देकर बहन को विदा किया।
टीम प्रमुख ओमकार और रघुराज ने नवदंपति को एक सदाबहार का पौधा उपहार देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जिस तरह से यह पौधा फलेगा, उसी तरह उनके जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने बताया कि यह पौधा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। ओमकार के मुताबिक, लोग लाखों का सामान तो उपहार में देते हैं, साथ ही उन्हें वर वधू को एक पौधा भी देना चाहिए।