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Kanpur News: मेडीक्लेम और एजुकेशन लोन को टैक्स में मिले छूट

Sun, 01 Feb 2026 01:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। आज संसद में देश का बजट पेश होगा। इसको लेकर हर वर्ग को कुछ खास मिलने की उम्मीद है। इस बार लोग बड़ी-बड़ी योजनाओं से ज्यादा सीधी राहत की उम्मीद कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि बजट हर वर्ग के लिए फायदेमंद हो। इसके अलावा त्वरित लाभ वाला हो। एक ओर युवा पढ़ाई की सामग्री कम करने की बात कह रहा है। वहीं बजट में मेडीक्लेम और एजुकेशन लोन को टैक्स छूट में शामिल किए जाने की भी जरूरत है। व्यापार बेहतर हो इसके लिए व्यापारियों को भी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। दवाइयों और रोजमर्रा के खर्च का बोझ कम करने को लेकर सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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फोटो-38- कंचन मिश्रा, अकबरपुर।
बढ़े आयकर छूट, सस्ती हो रोजमर्रा की वस्तुएं

हर घर की रसोई बजट पर निर्भर करती है। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्च का बोझ कम करने वाले बजट की दरकार है। इस बार बजट से उम्मीद है कि महंगाई से राहत मिले। संतुलन बना रहे और परिवार की जरूरतें पूरी हों। आयकर अधिक राहत दी जाए। इससे बचत बढ़ेगी और बच्चों का भविष्य संवारने में मदद मिलेगी। - कंचन मिश्रा, अकबरपुर।
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फोटो- 39-अंश सिंह, गहलौं
बजट में मिले सस्ती शिक्षा की सहूलियत

बजट में उम्मीद है कि सस्ती शिक्षा की सहूलियत मिलेगी। फीस अधिक होने से कमजोर आय वर्ग के लोगों को खासी परेशानी होती है। सरकार फीस कम करने के कदम उठाए। वहीं कॉलेजों के अतिरिक्त खर्चों पर रोक लगाई जाए। फीस के अलावा अन्य खर्चे थोपे जाते हैं। इससे परिवार पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। - अंश सिंह, इंजीनियरिंग छात्र, गहलौं
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फोटो- एडवोकेट हरीकृष्ण गुप्ता। संवाद
इस बजट में व्यापारी हित में केंद्र सरकार से मांग है कि गत वर्षों की तुलनात्मक ढंग से जीएसटी का कलेक्शन प्रत्येक वर्ष बढ़ रहा है। लेकिन जो व्यापारी टैक्स दे रहे हैं वह उपेक्षित हैं। जबकि चार दशक के पूर्व से राज्य और केंद्र सरकार को प्राॅफिट व समाधान राशि पर लाखों रुपये टैक्स एवं पेनाल्टी के रूप में जमा किया जाता है। ऐसे में केंद्रीय वित्तमंत्री से मांग है कि व्यापारी हित में पंजीकृत व्यापारी जो 65 वर्ष के ऊपर हैं उनके लिए व्यापारी पेंशन योजना लागू की जाए। - हरीकृष्ण गुप्ता, जीएसटी एडवोकेट पुखरायां
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फोटो- अभिनम ओमर। संवाद
केंद्र सरकार से किए जाने वाले बजट लोगों में निवेश किए जाने के लिए बढ़ावा दिए जाने वाला लाया जाना चाहिए। जिससे युवा स्वयं के व्यापार के लिए आगे बढ़े। बजट में मेडीक्लेम और एजुकेशन लोन को टैक्स छूट में शामिल किए जाने की जरूरत है। इसे नए टैक्स का रिजीम का हिस्सा बनना चाहिए। जीएसटी के अनुपालन में अभी भी समस्याएं हैं जिनमें सुधार कराने वाला बजट हो। - अभिनम ओमर, चार्टर्ड एकाउंट पुखरायां

फोटो- क्षितिज गुप्ता। संवाद
2017 से जीएसटी लागू हुए आठ वर्ष व्यतीत हो गए। जिसमें व्यापारी वर्ग ने टैक्स के रूप में, ब्याज के रूप में टैक्स दिया है। लेकिन जीएसटी का ऑप्शन अंग्रेजी में है। वित्तमंत्री की स्पीच भी अंग्रेजी में होती है। इस बार बजट में हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाए और ऑप्सन भी हिंदी में हो तो सरलता होगी। - क्षितिज गुप्ता, व्यापारी पुखरायां
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