यूपी विधानसभा चुनाव की तमाम तैयारियों पर हैलट में दवाओं का संकट बढ़ गया है। करीब 20 फीसदी दवाइयां ही बची हैं। इन हालात में चुनाव से पहले ही दवाएं खत्म हो जाएंगी। इससे गरीबों को इलाज कराने में खासी दिक्कत आएंगी।
हैलट में ओपीडी, मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी सभी विभागों में दवाइयों का टोटा है। चुनाव आचार संहिता में बजट न मिलने से समस्या विकराल हो गई है। हालत यह है कि चुनाव से पहले ही दवाइयां खत्म हो जाएंगी।
बजट इतना कम था कि दवाएं पहले ही खत्म हो गई थीं, जिसके बाद से हैलट और संबद्ध अस्पतालों में मरीजों के लिए सवा करोड़ रुपये की दवाएं उधार मंगाई जा चुकी हैं। हैलट प्रशासन की ओर से एसजीपीजीआई, केजीएमयू, सैफई मेडिकल कॉलेज को आवंटित बजट में से बचा धन देने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक वह भी नहीं मुनासिब हो सका है।