कानपुर: काकादेव में बैंक कर्ज में डूबे चाचा नेहरू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के ड्राइवर प्रेम शंकर (50) ने मंगलवार देर रात फांसी लगा ली। पुलिस को शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमेें उसने कर्ज की रकम 10 लाख होने से परेशान होकर जान देने की बात लिखी है।
काकादेव रामचरन की मड़ैया निवासी प्रेम शंकर बांस मंडी स्थित चाचा नेहरू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के ड्राइवर थे। परिवार में पत्नी रेनू और बेटा अनुभव है। बड़े भाई रामकुमार कश्यप ने बताया कि वर्ष 2007 में प्रेम शंकर ने एक प्राइवेट बैंक से लोन लिया था, जिसको वह अदा नहीं कर पाया। इसके चलते ब्याज समेत रकम 10 लाख रुपये हो गई।
बैंक वाले लोन अदा करने के लिए दबाव बना रहे थे। मंगलवार सुबह भी बैंक कर्मचारियों ने फोन किया, जिससे तनाव में आकर उन्होंने यह कदम उठाया। थाना प्रभारी राजीव सिंह का कहना है कि परिजनों ने बैंक लोन संबंधित कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि सुसाइड नोट में कर्ज का जिक्र है। परिजनों की ओर से तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।