मेडिकल साइंस के लिए रिसर्च का विषय बनीं कानपुर की विलाषा
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40 साल पहले सांप के जहर से मरने के बाद जिंदा वापस घर लौटने वाली कानपुर की विलाषा मेडिकल साइंस के लिए ‘कुदरत का सबसे बड़ा अजूबा’ बन चुकी हैं। अब विलाषा पर डॉक्टरों ने रिसर्च भी शुरू कर दी है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के डीन/प्रिंसिपल सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नवनीत कुमार ने कहा है कि मेरे जीवनकाल में विलासा जैसा कोई मामला कभी नहीं आया। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ऐसा कोई उदाहरण उनके पास नहीं है। ये मेडिकल साइंस के लिए बड़ा शोध का विषय है। हम उनकी एमआरआई, ईईजी, साइको, ब्लड प्रोफाइल आदि जरूरी जांचें फ्री कराएंगे। यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि ऐसा कैसे हुआ।
कानपुर साउथ बिधनू के ईनायतपुर मझावन गांव में शुक्रवार को उस समय खलबली मच गई जब यहां 40 साल पहले सांप के डसने से मृत घोषित की गई महिला लौट आई। 40 साल पहले उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया गया था। अब महिला की उम्र 80 साल है। महिला के लौटने पर पहले तो परिवार और गांव वालों को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब महिला ने पुरानी बातों, यादों, जान-पहचान अपनी चोटों और कई घटनाओं का जिक्र किया तो सब हक्का-बक्का रह गए।
यह हैरतअंगेज कहानी है घाटमपुर के पतारा की रहने वाली विलाषा रैदास (80) की। शुक्रवार सुबह विलासा अपनी ससुराल ईनायतपुर मझावन गांव पहुंची। विलासा के मुताबिक उसकी पहली शादी बिधनू के धीरपुर चरइया गांव के छिद्दू से हुई थी। छिद्दू से बेटी रामकुमारी और बेटा मुन्नीलाल हैं। पारिवारिक कलह के चलते उसने छिद्दू से नाता तोड़कर मझावन के ईनायतपुर गांव के कल्लू से शादी कर ली थी। कल्लू से बेटे धर्मवीर, धर्मपाल और बेटी राजरानी व ननकी है। अब छिद्दू और कल्लू की मौत हो चुकी है। विलासा ने बताया कि ईनायतपुर मझावन गांव में 40 साल की उम्र में उसे सांप ने डस लिया था।