एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट ‘नमस्ते डॉक्टर साहब...नमस्ते डॉक्टर साहब’ की टेर लगाते जा रहे हैं। नई छात्राएं दो चोटियां आगे करके चल रही हैं। यह खुलेआम रैगिंग जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हो रही है।
इसे रोकने के लिए बनाई गई एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य न जाने कहां हैं। एंटी रैगिंग स्क्वायड की गाड़ी सुबह प्रिंसिपल ऑफिस के सामने खड़ी हो जाती है और शाम को ड्राइवर के घर चली जाती है।
सदस्य रजिस्टर में दस्तखत बनाकर गायब हो जाते हैं। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को कैंपस में रैगिंग होते देखी और इसे रिकॉर्ड भी कर लिया है। हैरानी की बात यह है कि उस समय एंटी रैगिंग स्क्वायड के एक सदस्य एसबीआई की शाखा के सामने मौजूद थे लेकिन उन्होंने वहां जाना भी जरूरी नहीं समझा।
जूनियरों को सीनियरों का आदेश है कि क्लास से लेकर हॉस्टल तक आने-जाने के दौरान सिर नीचे रखना है और तेज आवाज में ‘नमस्ते डॉक्टर साहब...नमस्ते डॉक्टर साहब’ कहते हुए चलना है।
छात्राओं को आदेश है कि वह दो चोटी बनाएंगी और इसे आगे ही रखेंगी। दोपहर के 12 बजने के साथ ही मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थियेटर (एलटी) तीन से फर्स्ट ईयर स्टूडेंट हॉस्टल जाने को निकले। छात्र ब्वायज हॉस्टल पांच और छात्राएं गर्ल्स हॉस्टल की ओर जाने लगीं।
एलटी तीन से बाहर आते ही छात्रों ने ‘नमस्ते डॉक्टर साहब...नमस्ते डॉक्टर साहब’ बोलना शुरू कर दिया। तभी एक बाइक उधर से गुजरी तो छात्रों की आवाज भी तेज हो गई। हॉस्टल तक छात्र पहुंचे तो आवाज कुछ धीमी हो गई।
तभी ब्वायज हॉस्टल दो से अशोभनीय शब्द गूंजे, तब तक छात्र हॉस्टल के गेट के अंदर पहुंच चुके थे लेकिन डर का आलम यह था कि उनकी आवाज इतनी तेज हो गई मानो वह नारे लगा रहे हों। एलटी तीन से निकली छात्राओं ने बालों की चोटियों को आगे किया और सिर झुकाकर चल दीं।
कोई शिकायत तो करे
एंटी रैगिंग कमेटी के डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है। मेरी नजर में यह रैगिंग नहीं है। कमेटी के सदस्यों के साथ गुरुवार को बैठक कर जानकारी ली जाएगी। यदि किसी सीनियर छात्र ने कहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कमेटी के सदस्यों को छात्रों के साथ हॉस्टल तक जाने और वापस क्लास तक ले आने का आदेश है। छात्र मो. नंबर 8400331180 पर सूचना दे सकते हैं।