कार्यक्रम में नात और मनकबत का नजराना पेश किया
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के 805वें उर्स की अंतिम रस्म शुक्रवार को जुमे की नमाज बाद कानपुर के कर्नलगंज की सैयद दाता हसन सालार की खानकाह पर गुलपोशी चादर के साथ संपन्न हुई। इसमें मजार का इत्र, केवड़ा, संदल से गुस्ल कराया गया। इसमें कहा गया कि ख्वाजा गरीब नवाज ने हिंदुस्तान में अमन का पैगाम दिया। यहीं वजह है कि राजस्थान के अजमेर में उनकी खानकाह पर सभी धर्म और मजहब के लोग शामिल होते हैं। हालांकि इन दिनों राजस्थान में अमन के दुश्मन वहां का माहौल खराब कर रहे हैं।
कार्यक्रम में नात और मनकबत का नजराना पेश किया गया। मोहम्मदी यूथ ग्रुप के अध्यक्ष इखलाक अहमद डेविड ने कहा हजरत गरीब नवाज को हुजूर पाक के इंसानियत, अखलाक, मुहब्बत के पैगाम को हिंदुस्तान में फैलाने के लिए संजर से भेजा गया था। यही वजह है कि 900 सालों से भारत में हिंदू-मुसलमान एक साथ रहकर सौहार्द की मिसाल पेश करते आए हैं। हालांकि इन दिनों धर्म का चोला ओढ़कर मजहब को बदनाम करने वाले इंसानियत में रोड़ा बन रहे हैं। इस दौरान सैयद शादाब अली, हाफिज इसरार, गुलजार आलम, आजम महमूद, मोहम्मद मुबस्सिर, सैयद सरताज अली शाह, मोहम्मद इरफान बरकाती मौजूद रहे।