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मथुरा जवाहर बाग कांडः डीएनए टेस्ट के लिए 2 लोगों को अस्पताल ले गई सीबीआई टीम  

Tue, 16 Oct 2018 08:47 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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जवाहरबाग कांड की पुरानी तस्वीर
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जून 2016 में मथुरा के जवाहर बाग में हुए कांड को लेकर फर्रुखाबाद पहुंची सीबीआई टीम ने मंगलवार को दो लोगों का लोहिया अस्पताल में डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिया। जवाहर बाग कांड में राजेपुर निवासी मेवाराम राठौर और जिला शाहजहांपुर थाना अल्हागंज के गांव हलू नगला निवासी रामपाल की मौत हुई थी।
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घटना की जांच सीबीआई कर रही है। मंगलवार को सीबीआई इंस्पेक्टर विनीत कुमार, मेवाराम के बेटे सनूप और रामपाल के बेटे रामवीर के ब्लड का सैंपल लेने के लिए दोनों को लोहिया अस्पताल लेकर आए। यहां पर टीम ने पैथोलॉजी प्रभारी डॉक्टर एसपी सिंह ने वार्ता की। इसके बाद दोनों युवकों का पैथोलॉजी में खून का सैंपल लिया।

इन युवकों के साथ राजेपुर के गांव बड़ागांव परतापुर निवासी रविकुमार पुत्र लंकुश, गांव खंडौली नहरैया निवासी कृष्णपाल भी आए थे। सीबीआई इंस्पेक्टर ने कुछ भी बताने से इनकार किया। हालांकि मेवाराम के बेटे सनूप ने बताया कि जवाहर बाग को खाली कराने के लिए पुलिस ने फायरिंग की थी। जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना की सीबीआई जांच चल रही है। 
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जमीन कब्जाने को लेकर भड़की थी हिंसा, एसपी सिटी व एसओ हुये थे शहीद 

जवाहरबाग कांड की पुरानी तस्वीर
यूपी के मथुरा में 2 जून, 2016 को जवाहर बाग पर रामवृक्ष का अवैध कब्जा हटाने के लिये पुलिस पहुंची थी। जवाहर बाग को खाली कराने के लिये जो टीम बनी थी, उसका नेतृत्व एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी कर रहे थे। साथ में एसओ फरह संतोष यादव व फोर्स भी मौजूद थी।

पुलिस जैसे ही दीवार तोड़कर अंदर घुसी, रामवृक्ष के गुर्गों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस घटना में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव शहीद हो गए। दबंगों ने जवाहर बाग में आग लगा दी। जमकर तोड़फोड़, मारपीट और बवाल किया। पूरे मथुरा जिले में अचानक से हालात अशांत हो गए थे। इसमें सरगना रामवृक्ष भी मारा गया था। लेकिन उसके भक्तों ने रामवृक्ष के जिंदा होने की बात कही थी।  

 
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