स्नातक के पांच साल बाद भी कर पाएंगे परास्नातक
स्नातक के बाद अगर किन्हीं कारणों से आपने पांच साल तक पढ़ाई नहीं की थी और अब फिर से रेगुलर छात्र बनना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर ने संबद्ध महाविद्यालयों और परिसर में संचालित परास्नातक कोर्सों के एडमिशन नियमों में बदलाव किया है। इसके मुताबिक परास्नातक वर्ग में प्रवेश के लिए अब पांच साल तक की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इसका फायदा हजारों छात्रों को मिलेगा।
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार अभी तक स्नातक करने के पांच साल के अंदर ही छात्र रेगुलर परास्नातक कोर्स में दाखिला ले पाते थे। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा समिति ने इस पर सहमति दे दी है। नए सत्र से ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
ये भी हुए फैसले
पिछले साल नियमों की बाध्यता के चलते इस तरह के करीब ढाई हजार छात्रों को परास्नातक कोर्सों में एडमिशन नहीं दिया गया था। इस बार ऐसे छात्रों के लिए विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में एडमिशन लेने का अच्छा मौका है।
ये भी हुए फैसले
12वीं विज्ञान वर्ग से पढ़ाई करने वाले छात्र भी बीएससी एग्रीकल्चर के लिए अर्ह होंगे। अभी तक केवल उन्हीं छात्रों को मौका दिया जाता था जिन्होंने 12वीं एग्रीकल्चर से की हो।
जिस विषय से स्नातक किया है, उसी विषय से परास्नातक में एडमिशन दिया जाएगा।
प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 मई है।
प्रवेश परीक्षा के लिए विवि प्रशासन ने आठ, नौ व दस जून की तिथियां प्रस्तावित की हैं।
बैक पेपर की जगह अब इंप्रूवमेंट परीक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की समस्या को देखते हुए बैक पेपर खत्म करके इंप्रूवमेंट परीक्षा शुरू करने का फैसला लिया है। बता दें कि अगर इंप्रूवमेंट परीक्षा में छात्र के अंक पूर्व में आए अंक से कम होंगे तो अधिक वाले अंक को ही रिजल्ट में मान्य किया जाएगा जबकि बैक पेपर में यह सुविधा नहीं थी। छात्रों को बैक पेपर में जो अंक मिलते थे, वही रिजल्ट में चढ़ जाते थे। इसमें कई बार छात्रों का नुकसान भी होता था।
मतलब पहली परीक्षा में छात्र के अंक अधिक रहते थे लेकिन बैक पेपर में कम अंक मिलने पर रिजल्ट में कम अंक ही चढ़ जाते थे। शुक्रवार को परीक्षा समिति की बैठक में इस पर मुहर लग गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने की। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि इसका फायदा विश्वविद्यालय के करीब दस लाख छात्रों को मिलेगा। इसे नए सत्र से लागू करने पर सहमति बनी है।
बीएड-एमएड में बैक पेपर को मिली अनुमति
तीन साल के अंदर बीएड और एमड न कर पाने वाले सत्र 2015-17 के सैकड़ों छात्रों को भी परीक्षा समिति ने राहत दी है। ऐसे छात्र जो एक विषय में फेल हो गए थे, वे दस मई से आयोजित होने वाला बैक पेपर दे सकते हैं। परीक्षा समिति ने इस पर भी सहमति दे दी है।
नियमानुसार तीन साल के अंदर अगर छात्र बीएड या एमएड नहीं कर पाता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि इसका फायदा दो सौ से अधिक छात्रों को मिलेगा।