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सामूहिक विवाह या योजना की रस्म अदायगी: जींस-टॉप में पहुंचीं दुल्हनें, उपहार के लिए बारिश में भीगते रहे वर-वधू

Fri, 30 Oct 2026 05:27 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

चार दिवसीय आयोजन के पहले दिन 108 जोड़ों का विवाह हुआ। 10 मुस्लिम जोड़ों का निकाह हुआ। बारिश में उपहार लेने के लिए दूल्हा-दुल्हन भीगते रहे।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कहीं जींस-टॉप में दुल्हन सात फेरे लेने पहुंची तो कहीं मांग में सिंदूर भरने की रस्म की जगह माथे पर टीका लगाकर विवाह की औपचारिकता पूरी कर ली गई। किसी ने सलवार-सूट में वरमाला डाली तो कोई पारंपरिक दुल्हन के जोड़े के बिना ही मंडप में पहुंच गई। यह नजारा कहीं और नहीं बल्कि बिधनू में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित शादी समारोह में देखने को मिला। मंडप के नीचे बैठे जोड़ों की इन तस्वीरों ने आयोजन के स्वरूप और सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। गरीब परिवारों की बेटियों को सम्मान के साथ विवाह का अवसर देने के लिए आयोजित समारोह में रस्मों का यह बदला अंदाज चर्चा का विषय बना रहा। वहीं, पहले से प्रेम विवाह कर चुके जोड़ों के दोबारा सामूहिक विवाह समारोह में शामिल कर योजना का लाभ दे दिया गया।
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बिधनू के कठेरूवा स्थित गेस्ट हाउस में समाजकल्याण विभाग ने चार दिवसीय सामूहिक विवाह समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। पहले दिन भीतरगांव ब्लॉक के 108 जोड़ों का विवाह कराया गया। इनमें 10 मुस्लिम जोड़ों का निकाह भी शामिल रहा। समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विवाह की रस्में पूरी कराई गईं लेकिन आयोजन की तस्वीरों में सबसे ज्यादा चर्चा उन दुल्हनों की रही, जो जींस-टॉप और सलवार-कुर्ता में ही सात फेरे लेने मंडप में पहुंच गईं। विवाह के दौरान कहीं पारंपरिक रस्में निभाई गईं तो कहीं मांग भरने के बजाय माथे पर टीका लगाकर रस्म पूरी की गई।
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मंडप में दुल्हन के जोड़े की जगह जींस-टॉप
सामूहिक विवाह समारोह में चांदनी और राधिका की तस्वीरों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। भीतरगांव ब्लॉक के बरईगढ़ निवासी छंगू सोनकर की बेटी चांदनी घाटमपुर के गुजेला निवासी रामप्रसाद के बेटे शैलेंद्र कुमार के साथ विवाह करने पहुंची। चांदनी जींस-टॉप पहने थी। विवाह की रस्म के दौरान मांग में सिंदूर भरने के बजाय माथे पर टीका लगाया गया। इसी तरह भीतरगांव के चतुरीखेड़ा निवासी छेदीलाल की बेटी राधिका का विवाह कराने के लिए तरुण पुत्र कैलाश चंद्र दिल्ली से पहुंचा था। राधिका भी जींस-टॉप में ही विवाह की रस्मों में शामिल हुई। नौरंगा निवासी बालगोविंद की बेटी अंजलि ने दिल्ली निवासी फूलचंद्र के बेटे राहुल कुमार के साथ सात फेरे लिए। इस जोड़े में भी मांग भरने की जगह माथे पर टीका लगाने की रस्म हुई। मोहम्मदपुर निवासी रामबली कुरील की बेटी लक्ष्मी और घाटमपुर के कंधौली निवासी मोहित के विवाह में भी ऐसा ही दृश्य सामने आया।

 

पहले प्रेम विवाह, फिर सामूहिक विवाह समारोह में रस्में
समारोह में पहले से प्रेम विवाह कर चुके जोड़ों को भी सामूहिक विवाह में शामिल कर लिया गया। भीतरगांव के शाहपुर निवासी राम दिनेश की बेटी साधना देवी ने मुरादाबाद निवासी चंद्रशेखर के बेटे रौनक के साथ विवाह किया। सूत्रों ने बताया कि दोनों पहले ही प्रेम विवाह कर चुके थे। इसके बाद दोनों को सामूहिक विवाह में पात्र बनाकर योजना का लाभ दिया गया।

 

बारिश से बचाने की व्यवस्था नाकाफी
समारोह में विवाह की रस्मों के लिए वाटरप्रूफ पंडाल लगाया गया था लेकिन उपहार वितरण के दौरान व्यवस्था की पोल खुल गई। बारिश के बीच दूल्हा-दुल्हन उपहार लेने के लिए कतार में खड़े रहे। कई जोड़े भीगते हुए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। जब कि एक जोड़े से 15 हजार रुपये व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं इसके बाद भी अव्यवस्थाएं होने पर सवाल खड़े हो गए।

 
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10 मुस्लिम जोड़ों का निकाह भी कराया गया
पहले दिन समारोह में 10 मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलवी बिलाल काजी ने कराया। इनमें अकबरपुर निवासी इजाज के बेटे नौशाद और भीतरगांव के भदवारा निवासी नेहा का निकाह शामिल रहा। इसके अलावा फतेहपुर निवासी रमजान अली के बेटे मोहम्मद तस्लीम और भीतरगांव के मदनपुर निवासी रेशमा का भी निकाह संपन्न कराया गया।
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