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ससुराल वालों ने की बिना दहेज शादी की पहल, दुल्हन बोली सात जन्मों तक मिलें मुझे ऐसे सास-ससुर

Mon, 30 Nov 2020 11:53 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
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ससुराल वालों की बिना दहेज शादी की पहल से गदगद मोनिका बोली - फोटो : amar ujala
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कार्तिक पूर्णिमा पर परिणय सूत्र में बंधने जा रहीं मोनिका त्रिवेदी अपने ससुराल वालों की अनोखी पहल से गदगद हैं। वह कहती हैं, एक नए परिवार का हिस्सा बनने जा रही हूं। भाग्यशाली बेटियों को ही ऐसी ससुराल मिलती है, जैसी मुझे मिल रही है। उम्मीद है कि मेरी शादी दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खात्मे की नजीर बनेगी। नई परंपराओं के आगाज का बीज बोएगी।
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ऐसे लोगों को सबक मिलेगा, जो बेटियों की शिक्षा के बजाय दहेज को ही विवाह का आधार मानते हैं। ईश्वर से यही कामना हैै कि सात जन्मों तक मुझे ऐसे सास-ससुर मिलें। आरएसपुरम, सर्वोदय नगर की मोनिका की खुशियों के पीछे खड़े हैं, उनके ससुर प्रतिष्ठित अधिवक्ता कमलेश पाठक और दूरसंचार विभाग से सेवानिवृत्त सास सुषमा पाठक। दंपति ने अधिवक्ता बेटे चिन्मय की शादी में दहेज न लेने का फैसला किया है।

यही नहीं, सोमवार को बिठूर रोड स्थित पुरुषोत्तम ग्रीन में होने वाली शादी के दौरान सास-ससुर अपनी बहू को उपहार में कार भी भेंट करेंगे। मोनिका के पिता संजय त्रिवेदी दूरसंचार विभाग में राजभाषा अधिकारी के पद से रिटायर हैं। मोनिका ने प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनएनआईटी) से गणित में एमएससी की है, जबकि उनके होने वाले पति चिन्मय कानपुर कोर्ट में वकालत करते हैं। इनकी सगाई 25 अक्तूबर को हुई थी। (संवाद)
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दुल्हन के पिता और ससुर - फोटो : amar ujala
समाज को संदेश देना चाहता हूं
दहेज से घृणा है। लड़कियों के वैवाहिक मुकदमे नि:शुल्क लड़ता हूं। बेटे के विवाह से समाज को संदेश देना चाहता हूं। बेटियों के विवाह में दो से ढाई हजार लोग आमंत्रित थे, लेकिन इस बार पारिवारिक व कुछ करीबी लोगों को ही आमंत्रित किया है। दुबई से लौटे बेटी-दामाद भी समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे।
कमलेश पाठक, अधिवक्ता

विवाह मिसाल बने तो खुशी होगी
ईश्वर से कामना है कि नई परंपरा की शुरुआत हो और दहेज की कुरीति के खिलाफ यह विवाह एक मिसाल बने। कोरोना के चलते विवाह समारोह में दोनों ओर से कुल 100 लोगों को ही निमंत्रण दिया है। सभी की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर विवाह समारोह भी दिन का ही रखा गया है। 
संजय त्रिवेदी, मोनिका के पिता

समाज प्रभावित होगा तो विवाह सफल
शिक्षा ही जीवन की कुंजी है। मोनिका पर मां सरस्वती की कृपा है। गृहलक्ष्मी के रूप में मोनिका के साथ जीवन पथ पर चलने को तैयार हूं। परिवारवालों का छोटा सा प्रयास समाज को प्रभावित कर सके तो विवाह को सफल मानूंगा।
चिन्मय पाठक, वर
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