कानपुर में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में 51 अफसरों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर 41 अफसरों से फिर से जांच कराई जा रही है। दूसरी बार हुई इस जांच की रिपोर्ट नहीं आई है, जबकि पहले हुई जांच में कई लेखपाल गलत रिपोर्ट पर निलंबित हुए थे। अब इन्हीं लेखपालों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
लेखपालों ने सवाल उठाया है कि दूसरी रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया गया? इसके अलावा जिन लेखपालों ने तहसीलदार के साथ मिलकर बहाली करा ली, रिपोर्ट सिर्फ उन पर होनी चाहिए थी। इसमें सभी लेखपाल क्यों लपेट लिए गए? प्रशासन के पास इस बात का जवाब नहीं है। इसके अलावा घपलेबाजी की बात सामने आने के बाद 6000 आवेदन पत्रों की दोबारा जांच हुई थी।
कुल 2533 अपात्र पाए गए थे। इनमें से 409 आवेदन पत्रों का हवाला देकर लेखपालों को निलंबित किया गया। लेखपालों ने इन आवेदन पत्रों की कॉपी मांगी तो विकास भवन से सिर्फ 72 फार्म एसडीएम कार्यालय को भेजे गए। दूसरी बार में 132 फार्म भेजे गए। दूसरी लिस्ट में करीब 50 नाम पहली वाली लिस्ट के थे।
पहले भेजे गए 72 फार्म में करीब 40 ऐसे पाए गए थे जिनका सत्यापन सही हुआ था लेकिन पहली जांच टीम ने पात्र को अपात्र दर्शा दिया था। एसडीएम सदर दीपक पाल का कहना है कि रिपोर्ट इस बात पर है कि लेखपालों ने तहसीलदार के साथ मिलकर अपने पक्ष में भ्रामक रिपोर्ट लगवा ली। इस मामले में दोनों पक्ष ही दोषी हैं।