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शादी अनुदान योजना फर्जीवाड़ा: 41 अफसरों की रिपोर्ट आने से पहले ही दर्ज कराई एफआईआर, अब सामने आई ये बड़ी बात

Tue, 03 Aug 2021 10:32 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

लेखपालों ने सवाल उठाया है कि दूसरी रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया गया? इसके अलावा जिन लेखपालों ने तहसीलदार के साथ मिलकर बहाली करा ली, रिपोर्ट सिर्फ उन पर होनी चाहिए थी।
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शादी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में 51 अफसरों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर 41 अफसरों से फिर से जांच कराई जा रही है। दूसरी बार हुई इस जांच की रिपोर्ट नहीं आई है, जबकि पहले हुई जांच में कई लेखपाल गलत रिपोर्ट पर निलंबित हुए थे। अब इन्हीं लेखपालों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
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लेखपालों ने सवाल उठाया है कि दूसरी रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया गया? इसके अलावा जिन लेखपालों ने तहसीलदार के साथ मिलकर बहाली करा ली, रिपोर्ट सिर्फ उन पर होनी चाहिए थी। इसमें सभी लेखपाल क्यों लपेट लिए गए? प्रशासन के पास इस बात का जवाब नहीं है। इसके अलावा घपलेबाजी की बात सामने आने के बाद 6000 आवेदन पत्रों की दोबारा जांच हुई थी।

कुल 2533 अपात्र पाए गए थे। इनमें से 409 आवेदन पत्रों का हवाला देकर लेखपालों को निलंबित किया गया। लेखपालों ने इन आवेदन पत्रों की कॉपी मांगी तो विकास भवन से सिर्फ 72 फार्म एसडीएम कार्यालय को भेजे गए। दूसरी बार में 132 फार्म भेजे गए। दूसरी लिस्ट में करीब 50 नाम पहली वाली लिस्ट के थे।
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पहले भेजे गए 72 फार्म में करीब 40 ऐसे पाए गए थे जिनका सत्यापन सही हुआ था लेकिन पहली जांच टीम ने पात्र को अपात्र दर्शा दिया था। एसडीएम सदर दीपक पाल का कहना है कि रिपोर्ट इस बात पर है कि लेखपालों ने तहसीलदार के साथ मिलकर अपने पक्ष में भ्रामक रिपोर्ट लगवा ली। इस मामले में दोनों पक्ष ही दोषी हैं।
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हटाए जाएंगे 10 साल से तैनात लेखपाल 
शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में अपात्रों को पात्र बनाने और निलंबित होने पर कार्य बहिष्कार करने से नाराज जिलाधिकारी ने एक ही तहसील में 10 साल से तैनात लेखपालों की फाइल तलब की है। इन लेखपालों को अब अन्य तहसील में ट्रांसफर किया जाएगा। बताते हैं कि कई लेखपाल अपने रसूख की वजह से एक ही तहसील में वर्षों से जमे हैं। जिलाधिकारी ने लेखपालों के साथ ही राजस्व निरीक्षकों की फाइल तहसील से मांगी है। कई राजस्व निरीक्षक भी ऐसे हैं, जो तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही तहसील में डटे हैं। 

कार्रवाई से भयभीत लेखपाल दो फाड़
जिलाधिकारी की कार्रवाई से लेखपाल भयभीत हैं। जिला इकाई और सदर तहसील के लेखपालों में भी दो फाड़ हो गया है। 19 लेखपालों पर एफआईआर के बाद सदर तहसील के लेखपालों ने कार्य बहिष्कार वापस ले लिया। इन लेखपालों ने आरोप लगाया कि उनकी जिला इकाई ने उनका साथ नहीं दिया।

अध्यक्ष और महामंत्री ने प्रशासनिक अफसरों से मिलकर लेखपालों के गलत निलंबन का पक्ष नहीं रखा। इस पर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की जिला इकाई के महामंत्री केके मिश्रा का कहना है कि उनके स्तर पर जितना किया जा सकता था, किया गया। कार्य बहिष्कार वापस लेने का फैसला सदर के लेखपालों का है। वे भी मंगलवार को कार्य बहिष्कार वापस ले लेंगे। 
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