गांव के लोग लैंप के सहारे जीवन यापन कर रहे
कन्नौज के सौ से अधिक गांवों के लोग 70 सालों से ढिबरी और लैंप का सहारा लेकर बिजली की तलाश कर रहे हैं।
अधिकारियों की फटकार के बाद भी राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के चिह्नित गांवों में विद्युतीकरण का काम कार्यदायी संस्थाएं लापरवाही से कर रही हैंं। 11वीं योजना के तहत 765 गांव कार्यदायी संस्थाओं को विद्युतीकरण करने के लिए जुलाई 2013 में दिए गए थे। दिसंबर 2014 में यह सभी गांव विद्युतीकृत होने थे, समय पर काम पूरा न होने पर विभागीय अधिकारियों ने नवंबर 2016 तक का समय बढ़ा दिया। नवंबर का एक सप्ताह गुजर चुका है। फिर भी 37 गांव अभी विद्युतीकरण से वंचित हैं। तीन साल से यहां के ग्रामीण ढिबरी के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं। यही हाल 12 वीं योजना का है। अक्तूबर 2015 में कार्यदायी संस्था को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 811 गांव दिए गए थे, इन सभी गांव को दिसबंर 2016 में विद्युतीकृत करके विभाग को देना है। मात्र 53 दिन शेष हैं, जबकि अभी तक 109 गांव विद्युतीकरण के लिए बाकी हैं।
जिन गांवों में विद्युतीकरण का काम कराया गया है। उनमें भी लापरवाही बरती गई है। इससे कई गांव में लगाए गए बिजली के खंभे तिरछे हो गए हैं। इससे ग्रामीणों के सामने दिक्कतें आ रही हैं। शिकायत करने पर अधिशासी अभियंता की ओर से तिरछे पोलों को ठीक किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता विद्युत पीराम ने इस संबंध में कहा कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में लापरवाही बरतने पर पूर्व में काम कर रही कार्यदायी संस्था को हटाकर दूसरी संस्था को काम दिया गया है। इस कारण समय सीमा पर काम नहीं हो सका। अब जो निर्धारित समय सीमा दी गई है।