नेशनल हाईवे-86 वर्ष 2014 में बना था
हमीरपुर में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग-86 ‘यमदूतों’ का गढ़ बन चुका है। दुर्घटना में हर रोज मौतों से एनएचएआई और आरटीओ विभाग हैरान और परेशान है। हालातों को देखते हुए संकेतक बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है ताकि हादसों और मौतों पर कंट्रोल किया जा सके।
हमीरपुर मुख्यालय से गहबरा चौकी तक जिले की सीमा में कुल करीब 55 किमी दूरी तक हाइवे का फैलाव है। मार्ग का चौड़ीकरण कर इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा भी दे दिया गया। लेकिन सड़क कम चौड़ी व डिवाइडर और फुटपाथ न होने के कारण यह कहीं कहीं अधिक संकरा है। जिससे हाइवे पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जानें जा रही है। लोग इस राष्ट्रीय राजमार्ग को खूनी मार्ग भी कहने लगे हैं। होने वाली दुर्घटनाओं का आंकलन किया जाए तो इस मार्ग में अधिकांश मौदहा के मकरांव, सुमेरपुर में इंगोहटा के पास व कोतवाली क्षेत्र के चंदौखी मोड़ के पास दुर्घटनाएं अधिक हुई हैं। इतना ही नहीं उप संभागीय परिवहन विभाग के एआरटीओ मोहम्मद अजीम ने दुर्घटनाओं के मद्देनजर मार्ग का अवलोकन कर दुर्घटना बाहुल्य स्थानों का चिह्नांकन भी किया। एआरटीओ ने बताया कि दुर्घटना बाहुल्य इलाकों पर संकेतक बोर्ड लगाए जाने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है। मगर अभी तक एनएचएआई ने इस पर कोई पहल नहीं की है। नेशनल हाइवे-86 वर्ष 2014 में बना था। डिवाइडर न होने से हाइवे पर चलने का कोई मानक नहीं रहा। जिसे जहां जाना है वह अपनी सुविधा के हिसाब से वहीं से मुड़ने लगा। दो साल के अंदर हाइवे पर सैकड़ों हादसे हुए। जिनमें बड़ी संख्या में जानें गईं तो कई महीनों बिस्तर पर रहे।