महानगर और इसके आसपास के क्षेत्रों से ऐसे कई विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं, जो इस बार भाजपा की यूपी सरकार का हिस्सा हो सकते हैं। इसमें कुछ कैबिनेट और राज्यमंत्री तो कुछ विधानसभा अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं।
चर्चा है कि सात बार से लगातार विधायक चुने जा रहे सतीश महाना को विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी मिल सकती है। इसके लिए उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी और अभी तक भाजपा विधानमंडल दल के नेता रहे सुरेंद्र खन्ना से टक्कर मिल रही है। यह भी कहा जा रहा है कि यदि विधान सभा अध्यक्ष नहीं बने तो कैबिनेट में उनका स्थान पक्का है।
इससे पहले वह नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। इसी तरह और जिन विधायकों का नाम मंत्री बनने की चर्चा में हैं, उसमें तीसरी बार विधायक बने सत्यदेव पचौरी और कांग्रेस के कद्दावर नेता अजय कपूर को हराने वाले महेश त्रिवेदी प्रमुख हैं। सत्यदेव पचौरी पार्र्टी के वरिष्ठ नेता हैं और सलिल विश्नोई के चुनाव हार जाने की वजह से इनका नाम मंत्री बनने वालों की दौड़ आगे हो गया है।
महेश त्रिवेदी बसपा की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। दूसरी वजह यह है कि इन्होंने विपक्षी पार्टी के बड़े नेता को चुनाव में मात दी है। इस वजह से भी इन्हें मंत्री बनाने की चर्चा है। इसके अलावा पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री कमलरानी वरुण भी मंत्री बनने की लाइन में हैं। वह घाटमपुर से इस बार विधायक बनी हैं। चर्चा तो यहां तक है कि प्रदेश महासचिव सलिल विश्नोई और प्रदेश सचिव सुरेश अवस्थी को भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
पार्टी की रिपोर्ट में इन लोगों की हार को भितरघात बताया गया है। इस वजह से इन दोनों नेताओं को तवज्जो मिलने की बात कही जा रही है। नए विधायकों में नीलिमा कटियार और अभिजीत सिंह सांगा का भी नाम लिया जा रहा है। नीलिमा पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार की बेटी हैं, इस वजह से वह उनके कोटे से आ सकती है। जबकि सांगा ने पहली बार सत्ताधारी विधायक को बड़े अंतर से हराया है, इस वजह से उनका नाम भी चर्चा में है।