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Kanpur News: काले कंकड़ और सफेद पत्थर के पाउडर को मिलाकर बनाते थे खाद

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इटावा। जिला प्रशासन व कृषि विभाग की टीम की ओर से पकड़ी गई नकली उर्वरक काले कंकड़, सफेद पत्थर के पाउडर और रसायनिक रंगों का उपयोग करके जमीन व स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। यह तथ्य नमूनों की जांच में रिपोर्ट में सामने आए हैं।
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बीते वर्ष पांच नवंबर को नकली उर्वरकों के उत्पादन की सूचना पर उप कृषि निदेशक आरएन सिंह, जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार व नायब तहसीलदार शिखर मिश्रा की संयुक्त टीम ने थाना कोतवाली के कटरा बलसिंह में एक घर में बने गोदाम पर छापा मारा था। टीम को मौके पर 33 बोरी लाल रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ, 51 बोरी डीएपी जैसा काला दानेदार पदार्थ, 15 बोरी सफेद रंग का पाउडर सहित कई खाली बोरियां बरामद की गई थी। एक व्यक्ति को मौके से पकड़ा था। इसके बाद विभाग की ओर से तीनों नमूनों को जांच के लिए लखनऊ लैब में भेजा गया।
लैब में भेजे गए तीनों नमूने की रिपोर्ट फेल आई है। तीनों नमूने में कोई उर्वरक न मिलकर सिर्फ पत्थर एवं सफेद पाउडर मिला है, जो फसलों के साथ-साथ खेतों को भी बंजर बनाने का काम करता है। साथ ही डॉक्टरों के अनुसार, पकड़े गए पदार्थों में रसायनिक रंग से इस खाद के साथ होने वाली फसल सेहत के लिए भी हानिकारक है। इसके बाद कृषि विभाग एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। विभाग की ओर से संबंधित जांच रिपोर्ट संबंधित थाने को भेजने के साथ ही उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है।
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डीएपी में मुख्य रूप से 18 प्रतिशत नाइट्रोजन व 46 प्रतिशत फॉस्फोरस तत्व होते हैं। जबकि जांच रिपोर्ट में सिर्फ .2 फीसदी नाइट्रोजन व .5 फीसदी फॉस्फोरस निकला है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब्त किया गया उर्वरक पूरी तरह से नकली है। इसमें काले कंकड़ों में कुछ रसायन लगाया गया था।


एमओपी जैसे पदार्थ में नहीं मिला कोई भी तथ्य
एमओपी यानी कि म्यूरेट ऑफ पोटाश पिसे नमक की तरह सफेद, लाल रंग की ईंट के पाउडर अथवा सफेद नमक और लाल मिर्च के पाउडर के मिश्रण जैसा होता है। इसमें 60 फीसदी पोटाश होता है। पोटाश पौधों की वृद्धि और गुणवत्ता के लिए आवश्यक है। कार्रवाई के दौरान टीम को लाल रंग का एमओपी जैसा पदार्थ प्राप्त हुआ था, रिपोर्ट में इसमें कोई तत्व ही नहीं मिले।


जिंक सल्फेट फसल की पैदावार बढ़ाता है। मिट्टी के पीएच स्तर को नियंत्रित करता है। पत्तियों में जल्दी हरा रंग लाने और फलों की पैदावार बढ़ाने को बढ़ावा देता है। इसमें मुख्य रूप से जिंक और सल्फर होता है। जबकि जांच रिपोर्ट में इसमें कोई तत्व ही नहीं पाए गए और यह सिर्फ पाउडर निकला। जानकारों के मुताबिक जब्त किया गया पदार्थ पिसा हुआ सफेद पत्थर था।


नकली उर्वरकों के लगातार प्रयोग से उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर होने लगती है। इसके साथ ही फसलों पर कोई सकारात्मक प्रभाव न पड़ने से किसानों की मेहनत के साथ ही उनकी जेब पर अतिरिक्त भार भी पड़ता है। कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार के अनुसार इन तत्वों के प्रयोग से किसानों को नुकसान के सिवा कुछ हासिल नहीं होता है। इन जालसाजों के कारण भोले-भाले किसान ठगे जाते हैं। अधिकांश किसान उर्वरकों को लेने के बाद उनकी जांच नहीं करते और सीधे रूप से फसलों में उपयोग कर देते है और नुकसान के भागीदार बनते है।


डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि रसायनिक रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। यदि रसायनिक रंगों के उपयोग से कोई फसल तैयार हुई है तो उसकी उपज का उपयोग करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इस तरह के खान-पान से फेफड़े, गुर्दे कटने लगते हैं।



छापेमार कार्रवाई के दौरान पकड़े गए उर्वरकों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है, तीनों नमूने फेल हुए हैं। उक्त व्यक्ति के खिलाफ पहले ही विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। नमूने की रिपोर्ट भी संबंधित थाने में भिजवा दी गई है। इसके साथ ही उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है।
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प्रमोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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