इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के टॉप मैनेजमेंट गुरु अब कानपुर की लेदर इंडस्ट्री को हुनरमंद बनाएंगे। शहर के चमड़ा उद्यमियों, निर्यातकों और डिजाइनरों को प्रबंधन के गुर तो सिखाएंगे ही, टेक्नोलॉजी में विदेशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश भी की जाएगी। इस कवायद का मकसद कानपुर के चमड़ा उद्योग को विश्व स्तर पर अग्रणी करना है।
कानपुर का चमड़ा उद्योग टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट के मामले में पिछड़ने की वजह से उम्मीद के मुताबिक तरक्की नहीं कर पा रहा है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट(सीएलई) ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए एक्सपोर्ट ब्यूरो प्रमोशन और प्रदेश सरकार के सामने समस्या रखी।
एक्सपोर्ट ब्यूरो प्रमोशन के ज्वाइंट कमिश्नर आरके सिंह और सीएलई के रीजनल डायरेक्टर उज्जवल कुमार घटक के बीच हुई बातचीत में तय हुआ कि चमड़ा उद्योग को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आईआईएम से मदद ली जाए। योजना के मुताबिक आईआईएम को भी इसके लिए राजी किया गया। अब आईआईएम के विशेषज्ञ चमड़ा निर्यातकों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेंड करेंगे।
23 फरवरी से शुरुआत
एचबीटीआई स्थित सीएलई के ऑफिस में 23 फरवरी से इसकी शुरुआत होगी। आईआईएम लखनऊ के डायरेक्टर अजीत प्रसाद और आईआईएम नोएडा के प्रोफेसर एम अकबर निर्यातकों और चमड़ा निर्यातकों और उद्यमियों को व्यवसाय के गुर सिखाएंगे।