गरीबी में बिमारी अगर जान लेवा हो जाऐ तो हलात बद से बदतर हो जाते है। शायद इसी के चलते जिंतेद्र ने जान दे दी। इलाज का खर्च और उपर से परिवार वालो का बड़ती परेशानो को देखते हुऐ। इसी सब से परेशान हो कर उस ने यह कदम उठाया और शुक्रवार सुबह ट्रेन आती देख ट्रक पर लेट गया।
कानपुर के जरीब चौकी रेलवे क्रॉसिंग के पास जितेंद्र पाल (36) ने शुक्रवार सुबह ट्रैक पर लेटकर जान दे दी। परिजनों का कहना है कि कैंसर रोग से परेशान होकर जितेंद्र ने यह कदम उठाया है। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है। नौबस्ता के संजय गांधी नगर निवासी जितेंद्र कैंसर रोग से पीड़ित थे।
जेके कैंसर अस्पताल से पांच महीने पहले डिस्चार्ज हुए थे। तब से उनका घर में ही इलाज चल रहा था। पत्नी संतोषी प्राइवेट नौकरी कर परिवार का खर्च और पति का इलाज कराती थीं। संतोषी ने बताया कि शुक्रवार सुबह काम पर चली गईं।
इसके बाद जितेंद्र भी घर से निकल गए। वह जरीब चौकी क्रॉसिंग के पास पहुंचे। ट्रेन आती देख ट्रैक पर लेट गए। ट्रेन गुजरने के बाद उनका शरीर दो टुकड़ों में बंट गया। जितेंद्र की नाक में नली पड़ी थी। इससे साफ था कि वह बीमार थे। जीआरपी इंस्पेक्टर ने बताया कि मौकेपर शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों ने शव की पहचान की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। वही इस हादसे के बाद पत्नी संतोषी गहरे सदमे में है।