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इंसाफ: एकतरफा प्रेम में दरिंदे ने छात्रा के सीने में तमंचा सटा के मारी थी गोली, अब मिली फांसी की सजा

Thu, 04 Apr 2019 07:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोर्ट से बाहर निकलता हत्यारा अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
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औरैया जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने थाना एरवाकटरा क्षेत्र के ग्राम एरवाटिकुर में घर के अंदर घुसकर 14 वर्षीय छात्रा की गोली मारकर हत्या करने के दोषी युवक को मृत्युदंड दिया है। एक लाख 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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मामले में दोषी की पत्नी, मां व भाई को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार, ग्राम एरवाटिकुर निवासी रामप्रताप अवस्थी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 10 अक्तूबर 2014 की शाम साढ़े छह बजे के आसपास वह घर में बात कर रहा था।

 
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पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह तमंचा-कारतूस छोड़कर भागने लगा

उसकी 14 वर्षीय पुत्री निशा, जो कक्षा 10 की छात्रा थी, आंगन में पढ़ रही थी। पड़ोसी अजय कुमार (35) पुत्र रामनरेश घर में घुस आया और पुत्री के सीने में तमंचे से गोली मार दी। फायर की आवाज सुनते ही मोहल्ले के लोग भी आ गए। सभी ने मिलकर उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह तमंचा-कारतूस छोड़कर भागने लगा।

छीनाझपटी में उसके कपड़े वादी के हाथ में रह गए।  उधर, गोली लगने से निशा की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी की मां राधा देवी, भाई विजय व पत्नी ने बीच में आकर उसे भगा दिया। वादी का कहना था कि अजय कुमार पुत्री निशा को स्कूल आने-जाने में परेशान करता था। उसे धमकी देता था कि उसे जान से मारकर लड़की को उठा ले जाएगा।

 

मामला प्रेम प्रसंग का है, प्रेम प्रसंग में विफल रहने के कारण की हत्या

उसने लोकलाज वश कहीं किसी से कुछ नहीं कहा। इसकी रिपोर्ट एरवाकटरा थाने में अजय कुमार, उसकी मां राधा देवी, भाई विजय, पत्नी गीता देवी के विरुद्ध दर्ज कराई थी। यह मामला जिला सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार कोर्ट में चला। अजय कुमार के वकील का कहना था कि मामला प्रेम प्रसंग का है, प्रेम प्रसंग में विफल रहने के कारण अभियुक्त द्वारा यह अपराध किया गया।

अभियोजन पक्ष से डीजीसी अभिषेक मिश्रा, रमेश चंद्र मिश्रा व अधिवक्ता दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने कहा कि शादीशुदा अजय कुमार कोरी का अबोध बालिका से एकतरफा प्रयास करना तथा घर के अंदर गोली मारकर हत्या करना एक जघन्य अपराध में आता है। अभियोजन ने मांग की कि ऐेेेेेसे अभियुक्त को अधिकतम सजा दी जाए।

 
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फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक अजय कुमार की मृत्यु न हो

जिससे समाज में यह संदेश दिया जाए कि अपराधी के स्वेच्छा चरित्र के कारण किसी अबोध बालिका के हत्या जैसे अपराध का क्या परिणाम होता है। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने 14 वर्षीय निशा की  हत्या में आईपीसी की धारा 302 के तहत अजय कुमार को मृत्यु दंड दिया।

कोर्ट ने कहा कि उसके गले में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक अजय कुमार की मृत्यु कारित न हो जाए। साथ ही उस पर एक लाख रुपये अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया। अन्य धाराओं में अतिरिक्त कैद व अर्थदंड दिया गया। कोर्ट ने दंड की राशि वसूल होने पर 80 फीसदी धनराशि मृतका के माता-पिता को बतौर प्रतिकर देने का आदेश दिया।
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