कई दिनों से मांद में नहीं दिखे दोनों लकड़बग्घे
ग्रामीणों के मुताबिक बीते एक पखवाड़े पहले लकड़बग्घे के जोड़े ने पांडु नदी किनारे जंगल में बनी मिट्टी की मांद के अंदर पांच शावकों को जन्म दिया था। कुछ दिन बाद सभी शावक ठंड में धूप सेकने के लिए अपनी मांद के बाहर आकर बैठते उछल कूद करते भी किसानों ने देखा था। बीते गुरुवार दिन से शावकों के पास व मांद में दोनों लकड़बग्घे नहीं दिखे हैं।
दर्जन भर गांवों में फैली दहशत
तभी मालूम चला दोनों लकड़बग्घे बीते दो दिन से बरईगढ़-छतेरुवा मार्ग में गांव किनारे तक देखे गए हैं। इससे उनकी दहशत बौछनिया, मेहरौली, घुरुवाखेड़ा, छतेरुवा, बरईगढ़, निवादा उजागर, अमौर, सचौली बहादुरगढ़, एकघरा सहित दर्जनों गांवों में है। लकड़बग्घे की दहशत फैलने से किसान खेतों की तरफ नहीं पहुंच पा रहे हैं। खूंखार जानवर का खुलेआम सड़क पर घूमता हुआ देख ग्रामीण सकते में है।