कानपुर मूल के लंदन निवासी उद्योगपति रवि कुमार मेहरोत्रा बीते दो साल से गंगा का किनारा संवारने की आस लिए बैठे हैं। उनकी इच्छा है कि शहर में गंगा का किनारा दुनिया की अन्य नदियों के खूबसूरत किनारों की तरह दिखे। अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए वे कई बार गंगा पुनरुद्धार व जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी व नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अफसरों से मिल चुके हैं, लेकिन सरकार उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है।
रवि कुमार मेहरोत्रा ने वर्ष 2018 में गंगा के घाटों को संवारने का जिम्मा लिया था। कानपुर अपनी जन्मस्थली होने की वजह से यहां के घाटों का पुनरुद्धार उनकी प्राथमिकताओं में है। लेकिन वे सिर्फ घाटों की मरम्मत करा देने भर से अपने काम की इतिश्री नहीं करना चाहते।
उनका कहना है कि वे शहर में यादगार सुधार देना चाहते हैं। और यह सुधार गंगा का किनारा ही हो सकता है। पूरे शहर के लोग जब थकान महसूस करें तो गंगा किनारे के अद्भुत नजारों और साफ सुथरे माहौल में अपना दिन बिता सकें। यह आने वाली पीढ़ी के लिए सौगात होगी।
इनमें बड़ा निवेश होगा, इसलिए इसकी व्यापक योजना बनाकर काम करना चाह रहे हैं, लेकिन सरकार कानपुर में गंगा किनारे ऐसा मनोहारी स्थान उपलब्ध नहीं करा सकी है। डेढ़ वर्ष तक इंतजार के बाद नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अफसरों को पत्र लिखकर अपनी शर्तें भेज दी हैं, लेकिन सरकार या अफसरों की ओर से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। वे कहते हैं कि सरकार चाहे तो इस काम में उनका सहयोग कर सकती है। न चाहे तो वे स्वयं इस काम को करने के लिए तैयार हैं। बस शर्त ये है कि किनारा विकसित करने के बाद मेंटिनेंस का जिम्मा भी उन्हें ही मिले।
शिपिंग कारपोरेशन को खरीदने की तैयारी में
शहर के आर्य नगर निवासी रवि कुमार मेहरोत्रा देश के प्रतिष्ठित शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया में 64 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में हैं। इनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 1500 करोड़ है। रवि बाबू ने इसी कंपनी से मैरीन इंजीनियर के रूप में कॅरियर की शुरुआत की थी।