कानपुर। एमएसएमई इकाइयों को 31 मार्च तक भुगतान करने के बाद ही कारोबारी खर्च का लाभ रिटर्न में ले सकेंगे। भुगतान न होने की स्थिति में करदाता को लाभ नहीं मिलेगा और उसकी आय में जुड़ने पर आयकर का भुगतान करना होगाा।
सूक्ष्म और लघु इकाइयों से खरीदे गए माल या सेवा प्राप्त करने के मामले में क्रेता को भुगतान 15 दिन के भीतर करना होगा। यदि लिखित अनुबंध 45 दिन से अधिक का है। तब अधिकतम 45 दिन के भीतर भुगतान किया जाएगा।
तभी उस खर्च (खरीद) की धनराशि की छूट आयकर में आमदनी से घटाए जाने के रूप में उसी वित्तीय वर्ष में मिल सकेगी। अन्यथा उस धनराशि से आमदनी बढ़ जाएगी। आयकर का भुगतान क्रेता करदाता को करना होगा।
यह कानून सूक्ष्म एवं लघु निर्माण और सेवा देने वाली इकाइयों पर लागू है। ट्रेडर्स पर यह कानून लागू नहीं है। विशेषज्ञों ने बताया कि अभी तक सरकार ने इस नियम में कोई संशोधन नहीं किया है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी ये नियम लागू रहेंगे।
हालांकि यदि कारोबारी 15 दिन, 45 दिन की अवधि बीतने के बाद भी यदि क्रेता व्यापारी इसी वित्तीय वर्ष अर्थात 31 मार्च 2025 तक भुगतान कर देगा। तब उसे इसी वित्तीय वर्ष में खर्च (खरीद) की छूट का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी समाधान योजना 2025-26 के लिए आवेदन 31 मार्च 2025 तक करना होगा।