अब तक उन्नत इम्प्लांट विदेशों से आयात किए जाते थे
अब 3डी प्रिंटिंग तकनीक से मरीज की हड्डियों के आकार के इम्प्लांट तैयार किए जाएंगे, जिससे ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ेगी और जटिलताओं की संभावना कम होगी। नई तकनीक से बने इम्प्लांट बायोडिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल दोनों प्रकार के होंगे। बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट समय के साथ शरीर में घुल जाएंगे, जिससे दोबारा सर्जरी की जरूरत कम होगी। इससे मरीजों को दर्द, जोखिम और खर्च में राहत मिलेगी। अब तक इस तरह के उन्नत इम्प्लांट विदेशों से आयात किए जाते थे, जिससे इलाज महंगा होता था।
जल्दी स्वस्थ होने की नई उम्मीद
स्वदेशी निर्माण से लागत कम होगी और देश में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किए जाने वाले क्लीनिकल ट्रायल्स यह सुनिश्चित करेंगे कि इम्प्लांट पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हों। संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि उन्नत चिकित्सा इम्प्लांट्स के स्वदेशी विकास के लिए बहु-संस्थागत एवं उद्योग साझेदारियां जरूरी हैं। यह पहल आम मरीज के लिए बेहतर इलाज, कम खर्च और जल्दी स्वस्थ होने की नई उम्मीद लेकर आई है।