आंधी इतनी तेज थी कि प्लेटफॉर्म की छत पर लगा टीन का एक भारी-भरकम हिस्सा उखड़ गया और सीधे ट्रेन के इंजन की बिजली उत्पादन इकाई (OHE/इंजन यूनिट) से जा टकराया। टक्कर होते ही पूरे स्टेशन परिसर में किसी बम धमाके जैसी तेज आवाज गूंजी, जिससे यात्री दहशत में आ गए। इंजन और टीन के घर्षण से आसमान में ऊंची-ऊंची चिंगारियां उठती देख प्लेटफॉर्म पर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
टीन के तीन बड़े टुकड़े टूटकर पटरी और प्लेटफॉर्म के बीच गिरे। गनीमत यह रही कि उस समय इंजन के पास कोई यात्री मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तकनीकी टीम और रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुंचे। बिजली की लाइन काटकर इंजन में फंसे टीन के मलबे को हटाया गया। लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत और तकनीकी जांच के बाद स्थिति को सामान्य किया जा सका, तब जाकर रेलवे अधिकारियों और यात्रियों ने राहत की सांस ली।