उनका कहना है कि जब उन्होंने जिला उपाध्यक्ष पद के लिए बात की, तो जिला अध्यक्ष ने उनके सामने ऐसी शर्त रखी, जिसे सुनकर वह हैरान रह गईं। आरोप है कि जिला अध्यक्ष ने उन्हें दिल्ली और लखनऊ साथ चलने का प्रस्ताव दिया और बात न मानने पर पद से हटाने या पार्टी से बाहर करने की धमकी दी। आरोप लगाया कि पार्टी के दो अन्य पदाधिकारी भी उन पर जिला अध्यक्ष की बात मानने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित थीं, लेकिन जब उनके पति को दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई, तब उनका सब्र टूट गया और उन्हें फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बात सार्वजनिक करनी पड़ी।
जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह उनकी छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में उचित मंच पर अपना पक्ष रखेंगे। घटना के बाद जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के अंदर इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि स्थानीय स्तर पर मामले की जांच और सच्चाई सामने आने की मांग उठने लगी है।