महोबा जिले की पीआरवी पुलिस का एक बार फिर सराहनीय कार्य सामने आया है। तीन दिन पहले आधे-अधूरे शब्दों को एआई की मदद से जोड़कर झारखंड की महिला को परिजनों से मिला चुकी पुलिस ने बुधवार को भी एक ऐसा ही कार्य किया। रास्ता भटकी मासूम नाम-पता बता पाने मेंं असमर्थ थी। तब पुलिस उसके इशारों व संकेतों को समझते हुए परिजनों तक पहुंची। मासूम बेटी को पाकर पिता ने उसे गले से लगाया और पुलिस के कार्यों की सराहना की।
श्रीनगर-महोबा मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास बुधवार की सुबह एक पांच वर्षीय बालिका अकेले श्रीनगर की ओर से जा रही थी। जो अपना नाम-पता सही से नहीं बता पा रही थी। इसकी सूचना लोगों ने पीआरवी 7336 को दी। सूचना मिलते ही पीआरवी कमांडर शमीम खान व चालक रणजीत सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे और बच्ची को अपने संरक्षण में लेते हुए उच्चाधिकारियों को सूचना दी।
पुलिस की पूछताछ में वह पिता का नाम राकेश बता रही थी जबकि अपना नाम व पता नहीं बता पा रही थी। तब पीआरवी कर्मियों ने बालिका को समझाते हुए उसके बताए इशारों और संकेतों का समझने का प्रयास किया। बाद में पीआरवी कर्मी उसके इशारों के आधार पर कस्बा श्रीनगर की ओर से ले गए। जहां से उसके घर तक पहुंचने में मदद मिली। बच्ची को सकुशल पाकर पिता राकेश ने उसे सीने से लगा लिया और पुलिस कर्मियों का आभार जताया।
वहीं, तीन दिन पहले भी जिले की पुलिस ने झारखंड से महोबा भटक कर रही महिला को परिजनों से मिलाया था। वह भी अपना नाम-पता सही से नहीं बता पा रही थी। टूटे-फूटे शब्दों को एआई की मदद से जोड़कर पुलिस ने महिला की पहचान हीरा तोपनो निवासी खूंटी, झारखंड के रूप में की थी। बाद में परिजनों को बुलाकर सौंप दिया था। उधर, अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह का कहना है कि पुलिस बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए तत्परता से काम कर रही है। जिससे सफलता मिल रही है। भटकी मासूम बच्ची को पुलिस ने इशारों के माध्यम से उसके परिजनों तक पहुंचाया।