बिजली उपखंड अजनर में बिजली विभाग के जेई की ओर से उपभोक्ताओं को जमा बिलों की फर्जी रसीदें थमाकर लाखों रुपये की हेराफेरी करने के मामले की परतें खुलने लगी है। अधीक्षण अभियंता आरएस गौतम की ओर से नामित तीन सदस्यीय टीम ने जांच में मामला सही पाया। गबन के आरोपी जेई अमित पांडेय को निलंबित कर जांच के लिए मुख्य अभियंता को रिपोर्ट भेजी गई है। वहीं, ऑपरेटर को हटा दिया गया है।
अजनर क्षेत्र के 100 से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा नलकूप कनेक्शन धारकों ने रुपये जमा करने के बाद बिलों की रसीद फर्जी देने की शिकायत 10 सितंबर को की थी। आरोप लगाया था कि बिजली विभाग के जेई ने कंप्यूटर ऑपरेटर के सहयोग से लाखों रुपया जमा कर बिल की फर्जी रसीदें उपभोक्ताओं को थमा दीं। बिल अदा करने के बाद भी बकाया बिल जुड़कर आ गया। अधीक्षण अभियंता ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर अधिशासी अभियंता ग्रामीण अनिल कुमार, एसडीओ प्रदीप कुमार और लिपिक राकेश परिहार को जांच सौंपी थी।
गुरुवार को जांच रिपोर्ट आने पर अधीक्षण अभियंता ने जेई अमित पांडेय को निलंबित कर दिया व कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ कुमार को हटा दिया गया। मामला सामने आने पर जेई को एक सप्ताह से मुख्यालय की मीटर लैब में तैनात किया गया था। उधर, अधीक्षण अभियंता आरएस गौतम का कहना है कि मामले की जांच में जेई और कंप्यूटर ऑपरेटर की मिली भगत से फर्जी रसीद उपभोक्ताओं को देकर धनराशि हड़पने की पुष्टि हुई है।