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महोबा रेल हादसा: काल के पंजों में जकड़ी थी ट्रेन, यात्री बोले संकट मोचक ने बचाई जान

Fri, 31 Mar 2017 02:00 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

घटना स्थल के समीप स्थित हनुमान मंदिर पर लोग जता रहे आस्था
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महोबा में महाकौशल एक्सप्रेस के आठ डिब्बे हुए बेपटरी
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विस्तार
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कहावत प्रचलित है जाको राखे साईंया मार सके न कोई.. यह गुरुवार को महोबा मे हुए महाकौशल एक्सप्रेस हादसे पर सटीक बैठती है। हादसे के वक्त ट्रेन को काल ने अपने पंजों में जकड़ ही लिया था कि लाइन किनारे लगे पेड़ यात्रियों के लिए संकट मोचक साबित हुए। 
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साथ ही अंडरब्रिज की खोदी गई मिट्टी ढेर ने भी ज्यादा नुकसान से बचा लिया। हादसे से बच गए यात्री दुर्घटना स्थल के पास बने हनुमान मंदिर पर आस्था जता रहे हैं। संटिंग हुक से अलग होकर 20 फीट नीचे गिरी बोगियां पेड़ और मिट्टी के ऊंचे ऊंचे ढेरों में टिक गई। जिससे सैकड़ों लोगों की जान बच गई। 

लाड़पुर गांव के पास रेलवे द्वारा अंडरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। ट्रैक के दोनों तरफ जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई कराकर अंडरब्रिज बनाया गया है। इसी ब्रिज की निकली मिट्टी को रेलवे ट्रैक के किनारे ढेर लगाकर डाल दिया गया। ऊंचे ऊंचे मिट्टी के ढेर और रेल लाइन के किनारे बड़े बड़े पेड़ लगे है। जबलपुर से चलकर दिल्ली जा रही महाकौशल एक्सप्रेस जैसे ही लाड़पुर के पास अंडरब्रिज से गुजरी तभी पीछे के पांच डिब्बे पटरी से उतर कर खाई में ज गिरे। लेकिन पेड़ों और मिट्टी के ढेरों में टिक जाने से बड़ा हादसा टल गया। लोग पेड़ों को संकट मोचक मान रहे है। 
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विनीत कुमार, मनोज, हरीदास समेत तमाम ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थान पर कभी  भी कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है। प्राचीन हनुमान मंदिर होने के चलते लोगों की आस्था जुड़ी है। वह बताते है कि इतने बड़े ट्रैन हादसे में किसी का भी हताहत न होना ईश्वरी चमत्कार है। एक बार 420 नंबर गेट पर ट्रैक्टर ट्रैक में फंस गया था। काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी न निकलने से चालक व ग्रामीण घबरा गए थे। उसी समय अचानक ट्रेन आ गई। ट्रेन को देखते ही चालक घबरा गया उसी समय ट्रैक्टर एकाएक स्टार्ट होकर ट्रेन आने से चंद मिनट पहले ही निकल गया। उसके बाद ये दूसरा ईश्वरी चमत्कार है। इतना भीषण हादसा होने के बाद भी सभी यात्री सकुशल बच गए। 

एक किमी तक जमीन पर दौड़ती रही ट्रेन
महाकौशल एक्सप्रेस के सात डिब्बे ट्रैक से नीचे उतरकर गिर गए। जबकि एक डिब्बा आगे के डिब्बों में लगा रहा और पटरी से उतरकर जमीन (स्लीपर) पर दौड़ता रहा। घटना स्थल से एक किमी आगे ट्रेन रुकने तक ट्रैक में बने स्लीपर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। सीमेंट के बने स्लीपर ट्रेन के दौड़ने से टूट गए। जिन्हें पुलिस कर्मचारियों ने हटाकर नए स्लीपर बिछाए जाने का कार्य शुरू करा दिया है। 

शिकायत पर ट्रेन को लिया कब्जे में
ट्रेन हादसे में जहां ग्रामीण राहत कार्य में जुटे रहे। वहीं कुछ बदमाशों द्वारा यात्रियों का सामान चुरा लिया गया। इसकी शिकायत पर पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने पुलिस कर्मचारियों की ट्रेन के चारों तरफ घेराबंदी कर ट्रेन के कब्जे में ले लिया। जिससे लंबी यात्रा पर निकले तमाम यात्रियों का सामान सुरक्षित बच गया। पुलिस अधीक्षक ने यात्रियों का सामान निकलवाने के बाद पुलिस कस्टडी में रखा दिया। बाद में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद यात्रियों को सामान दिया गया।
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