माघ के महीने काे सबसे पवित्र कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि माघ महीने में सभी देवता पृथ्वी पर आते हैं। इस दिन वह सभी संगम पर स्नान, दान और जप करते हैं। इसी वजह से माघ पूर्णिमा मनाने लाखों भक्त गंगा स्नान के लिए अाते हैं। यहां स्नान, मेले, जप, यज्ञ का आनंद लेते हैं।
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डेमो पिक
मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सबसे पहले इस दिन सूरज उगने से पहले स्नान करें। स्नान खत्म करते ही सुर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाने के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान मधुसूदन की पूजा करें।
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दिन में गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान और दक्षिणा दें। दान में काले तिल विशेषकर दें। इससे पितरों को शांति मिलती है।माघी पूर्णिमा को कुछ धार्मिक कर्म संपन्न करने की भी विधि शास्त्रों में दी गई है। प्रातः काल नित्यकर्म एवं स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का विधि पूर्वक पूजन करें।
पितरों का श्राद्ध करें। असमर्थों को भोजन, वस्त्र तथा आय दे। तिल, कम्बल, कपास, गुड़, घी, मोदक, फल, चरण पादुकाएं, अन्न और दृब्य आदि का दान करके पूरे दिन का व्रत रखकर विप्रों, तपस्वियों को भोजन करना चाहिए और सत्संग एवं कथा-कीर्तन में दिन-रात बिताकर दूसरे दिन पारण करे।