कानपुर। माघ पूर्णिमा बुधवार को है। इस दिन महाकुंभ में शाही स्नान तो होगा ही, साथ ही गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। इस दिन दान देने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन विशेष व दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक पांडे ने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा जाता है। इसका धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। गरीबों को भोजन, वस्त्र, तेल, कंबल, कपास, घी, लड्डू, फल व चरण पादुकाएं आदि का दान किया जाता है। सुबह सूर्य मकर राशि में, बुध और शनि कुंभ राशि में, शुक्र और राहु मीन राशि में, देवगुरु बृहस्पति वृष राशि में, मंगल मिथुन राशि में, चंद्रमा सिंह राशि में, केतु कन्या राशि में व बुधवार का दिन होने से एक विशेष व दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश रूप बदलकर त्रिवेणी के संगम में स्नान करने आते हैं। वह लोग भाग्यशाली हैं जो इस वर्ष महाकुंभ में त्रिवेणी के संगम में स्नान करने गए हैं।
घर पर भी स्नान करने से मिलेगा लाभ
विष्णु पुराण के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा में तिल युक्त हवन, तिल युक्त जल से स्नान, तिल युक्त भोज्य पदार्थ, तिल के तेल से मालिश, तिल का उबटन, तिल से तर्पण, तिल युक्त सामग्री का दान करने से अत्यधिक लाभ मिलता है। छोटे बच्चे, रोगी व बुजुर्ग घर पर भी माघ मास की स्नान का लाभ ले सकते हैं। काले तिल, गंगाजल, तुलसी, जल मिला लें और इस पर पतित पावनी मां गंगा का स्मरण करते हुए स्नान करें।
स्नान से पितरों को मिलती है तृप्ति
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 फरवरी को शाम 6:55 बजे से प्रारंभ हो गई। समापन 12 को शाम 07:22 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, माघ पूर्णिमा 12 को है। राजा भगीरथ ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराया था, इसलिए माघ मास में स्नान से पितरों को भी तृप्ति मिलती है। पूर्णिमा तिथि चंद्रमा की ऊर्जा से भरपूर होती है, जिससे मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति होती है। माघ पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी पूरी चमक धारण करता है, जिससे पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दिन सौर व चंद्र ऊर्जा के अद्भुत संतुलन का प्रतीक है। इस दिन ध्यान व साधना करना अधिक प्रभावी होता है।