कानपुर नगर सीमा से लगी मैथा तहसील के बैरीदरियाव का महेंद्र कुमार आज बीस वर्ष का है। करीब पांच वर्ष पहले अचानक दोनों आंखे खराब हो गई और पूरी तरह से दिखना बंद हो गया। आंखें खराब हो जाने के बाद निराश महेंद्र को रेडियो स्टेशन वक्त की आवाज के साथी मददगार बने।
थोड़े दिनों में ही महेंद्र ढोलक, नाल बजाना सीख गया और अब भजन, कीर्तन भी करने लगा है। लोग उसे रामायण, शुभ मौके पर गाने व बजाने के लिए बुलाते हैं। बैरीदरियाव गांव के चंद्रप्रकाश दिवाकर का बड़ा पुत्र महेंद्र पंद्रह वर्ष तक ठीकठाक था। पांच वर्ष पहले अचानक उसकी दोनों आंखे खराब हो गई। जबकि उसके दोनों भाई बहन रोहित व रूबी पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।
नेत्रहीन हो चुका महेंद्र अपना घरेलू काम अपने हाथ से ही निपटा लेता है। पिता व भाइयों के साथ जाकर खेत में भी काम करता है। रेडियो स्टेशन की समन्वयक राधा शुक्ला ने बताया कि महेंद्र सीखने में बहुत तेज है। थोड़े ही प्रयास में ढोलक नाल बजाना सीख गया। रेडियो कर्मी हरेंद्र, प्रतिभा, हरी पांडेय, सुमित, करिश्मा ने बताया कि महेंद्र अब सुर लय ताल के साथ गाना गाना भी सीख गया है। अब अपने हुनर को की मुकाम बनाने की तैयारी में लगा हुआ है।