नदियों में लगातार गिर रही गंदगी को रोकने के सरकारी प्रयासों के बीच आईआईटी कानपुर ने ऐसी मशीन विकसित की है, जो पानी की तरंगों से चार्ज होगी। नदी में लगी मशीन के सेंसर बेस स्टेशन पर हर पल पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की मात्रा बताएंगे।
प्रोजेक्ट के मुखिया प्रोफेसर बिसाख भट्टाचार्य के मुताबिक, अमेरिका की मिसिसिपी नदी में लगी मशीन भी बैट्री से चलती है, लेकिन यह बेहद कम पानी में चार्ज हो सकेगी। प्रो. भट्टाचार्य के मुताबिक, देश की ज्यादातर नदियों में शहरी अपशिष्ट और औद्योगिक कचरा जा रहा है।
इस उत्प्रवाह पर लगातार नजर रखने के लिए ऐसी मशीन की जरूरत थी, जो रीयल टाइम मॉनिटरिंग के अलावा समय-समय पर पानी की गुणवत्ता भी बता सके। विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय के निर्देशन में अमेरिका के साथ मिलकर एक टीम बनाई गई। टीम में प्रो. इंद्रसेन, प्रो. केतन राजावत, प्रो. मंगल कोठारी और प्रो. एलेक शामिल हैं।
टीम ने मिसिसिपी नदी में लगी मशीनों की कार्यप्रणाली समझी। पानी के नमूने लेने के लिए ऑटो सैंपलर और पानी का रंग आदि देखने के लिए चैनलाइजर इस्तेमाल किए गए। एनएसवीएस (नीरशरा स्वयंशासित वेधशाला) नाम की इस मशीन को 10 सेंसरों के साथ तैयार किया गया।
ये सेंसर पानी में घुलित ऑक्सीजन, ठोस कचरे, केमिकल, हैवी मेटल्स और विद्युतीय चालकता आदि की रिपोर्ट भेजेंगे। मेन सेंटर से सेट समय के अनुसार मशीन डाटा को क्लाउड (कंप्यूटर) को भेजेगी। एनएसवीएस पूरे साल किसी भी समय नदी में गिरने वाले कचरे, पानी की गुणवत्ता आदि की निगरानी करेगी।
फिलहाल, आईआईटी के पास स्थित एक झील में इसका परीक्षण चल रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से हुए समझौते के तहत छह माह में 20 ऐसी मशीनें तैयार गंगा और यमुना के अलावा अन्य सहायक नदियों में लगाई जाएंगी।