दिल की धमनी का कितना हिस्सा कहां-कहां ब्लॉक है? इसमें कितना कैल्शियम जमा है? कोलेस्ट्राल या खून के थक्के का आकार कितना बड़ा है? ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) मशीन से जांच में यह सारी स्थिति स्पष्ट हो जा रही है। इससे हृदय रोगी को सटीक इलाज मिल रहा है। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में ओसीटी मशीन से तीन महीने में 50 रोगियों को उपचार किया गया है। रोगियों का इलाज मुफ्त है।
दिल की धमनी के ब्लॉकेज के इलाज में ओसीटी मशीन के इस्तेमाल को लेकर अमेरिकी कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और यूरोपीय सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी ने भी गाइडलाइन जारी की है। कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि यह अत्याधुनिक मशीन है। हार्ट अटैक के रोगियों के दिल की धमनियों में ब्लॉकेज पता करने के लिए एंजियोग्राफी जांच की जाती है। इस जांच में खून के थक्के का सही आकार, नसों में कैल्शियम का जमाव, लीकेज का सटीक पता चलने में दिक्कत होती है।
ओसीटी से सब कुछ बिल्कुल स्पष्ट रहता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि थक्के का आकार छोटा लगता है, लेकिन स्टेंट लगाते वक्त सही स्थिति पता चल पाती है जिससे दो स्टेंट लगाने पड़ जाते हैं। एंजियोग्राफी में कैथेटर के माध्यम से डाई डालते हैं। इससे मोटा-मोटा आइडिया ही लग पाता है। ओसीटी मशीन से ब्लॉकेज की स्थिति के लिहाज से इलाज मिलता है। कैल्शियम का जमाव हटा दिया जाता है।
केस-एकः फर्रुखाबाद के रहने वाले महेश (32) को हार्ट अटैक आने के बाद कार्डियोलॉजी में भर्ती किया गया। उसे थक्का गलाने वाली दवा दी गई लेकिन तकलीफ बनी रही। एंजियोग्राफी में 50 फीसदी ब्लॉकेज आया, लेकिन जब ओसीटी मशीन से जांच की गई तो थक्का 80 फीसदी निकला। नस में भी लीकेज हो गया था।
केस-दोः जाजमऊ के रहने वाले सुहैल (35) के हार्ट अटैक के लक्षण आए। एंजियोग्राफी इमेज में बहुत हल्का कैल्शियम जमाव नजर आ रहा था लेकिन जब ओसीटी मशीन से जांच की गई तो नसों में कैल्शियम भरा पड़ा था। इसके बाद कैल्शियम संबंधी उपचार किया गया।
ऐसे होती है जांच
कैथेटर के जरिये कैमरे को ब्लॉकेज वाले स्थान पर डालते हैं। अल्ट्रासोनिक किरणों के नसों में जाने से वसा, कैल्शियम आदि का जमाव पता चल जाता है। साथ ही थक्के की बनावट और आकार पता चलता है। इसके साथ नसों में कैल्शियम के जमाव को तोड़ने में भी इससे मदद मिलती है।