पाटनपुर गांव का राजकीय हाईस्कूल विद्यालय
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सरकारे भले ही अच्छी शिक्षा देने के नाम से आलीशान भवन निर्माण कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के आकड़ों में इजाफा कर लें। लेकिन शिक्षा की जमीनी हकीकत कुछ और है। इसे जानने के लिए बस एख बार ये खबर जरूर पढ़ें...
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इसे देखने के लिए पाटनपुर गांव स्थित राजकीय हाईस्कूल का जाएजा लिया। जहां एक अध्यापक 90 बच्चों को घेरे मिला। फिलहाल बच्चों के भविष्य के साथ शिक्षा विभाग खिलवाड़ कर रहा है। अब तो स्कूल के बच्चे भी कहने लगे है 'गुरू जी इस ओर ध्यान दो'.....
यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा में विकासखंड क्षेत्र के पाटनपुर स्थित राजकीय विद्यालय में बच्चों को किसी प्रकार की कोई सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे बड़ी समस्या तो पेयजल की है। इसके साथ साथ अध्यापकों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। जबकि यह विद्यालय लगभग छह साल से चल रहा है। इस विद्यालय में कक्षा नौ व दस के छात्र व छात्रों की संख्या 90 बताई जा रही है।
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जबकि सोमवार सुबह दस बजे पहुंचने पर कुल उपस्थिति 75 मिली। हालांकि इस विद्यालय में किसी प्रकार की बच्चों को सुविधाएं न मिल पाने से बच्चों के भविष्य के साथ में खिलवाड़ किया जा रहा है। क्योंकि अगर बच्चों को प्यास लगती है तो दूसरे विद्यालयों में लगे हैंडपंपों में पानी पीने जाना पड़ता है। इतना ही नहीं इस विद्यालय में पेशाब घर की व्यवस्था नहीं है।
विद्यालय में बिजली भी ध्वस्त है। शासन सर्व शिक्षा के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद शिक्षा की स्थित बद्दतर है। विद्यालय में छात्रावास की व्यवस्था है। प्रधानाचार्य हीरालाल सोनकर अपने ऑफि स के काम के साथ समय बचने के बाद बच्चों को शिक्षा देते हैं। इस मामले में डीआईओएस डा.चंद्रशेखर मालवीय का कहना है कि राजकीय कालेजों में टीचरों की भारी कमी है। बचे टीचरों से ही किसी तरह काम लिया जा रहा है।
-सुविधाओं के नाम पानी व शौचालय जैसी व्यवस्थाएं नहीं