वर्तमान पुलिस व्यवस्था से कानपुर में क्राइम कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। लूट, हत्याएं, चोरियां आम बात हैं। वहीं बिकरू गांव जैसे कांड ने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। कम अनुभवी पुलिस और लापरवाही के अलावा लचर कानून व्यवस्था के फेर में वारदात पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अगर कमिश्नरी प्रणाली कानपुर में लागू हो जाए तो अपराध में कमी आ सकती है। लखनऊ और नोएडा इसके उदाहरण हैं। यहां कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के छह महीने में ही बड़े बदलाव देखने को मिले। अपराध नियंत्रित हुआ। पुलिसिंग बेहतर हुई। पुलिस के व्यवहार और कार्यशैली में भी सुधार आया।
50 फीसदी कम हुईं हत्याएं, लूट में भी कमी
लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद हत्या की वारदात में तकरीबन 50 फीसदी की कमी आई है। राजधानी लखनऊ में 2019 में 64 हत्याएं हुईं थीं जबकि 2020 में ये संख्या 38 रह गई। वहीं नोएडा में पिछले साल 52 हत्याएं हुईं, इस साल 37 केस हत्या के दर्ज हुए। इसके अलावा लखनऊ में पिछले साल 163 लूट की घटनाएं हुई थीं, जो इस साल 38 ही हैं। नोएडा में भी लूट की घटनाएं 50 फीसदी कम हुई हैं। ये आंकडे़ कमिश्नरी लागू होने के बाद 15 जनवरी से 15 जुलाई तक के हैं।