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यूपी: कमिश्नरी लागू होने से लखनऊ और नोएडा में घटा अपराध, अब कानपुर में भी बदलाव जरूरी

Mon, 20 Jul 2020 01:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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क्राइम इन यूपी - फोटो : अमर उजाला
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वर्तमान पुलिस व्यवस्था से कानपुर में क्राइम कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। लूट, हत्याएं, चोरियां आम बात हैं। वहीं बिकरू गांव जैसे कांड ने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। कम अनुभवी पुलिस और लापरवाही के अलावा लचर कानून व्यवस्था के फेर में वारदात पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अगर कमिश्नरी प्रणाली कानपुर में लागू हो जाए तो अपराध में कमी आ सकती है। लखनऊ और नोएडा इसके उदाहरण हैं। यहां कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के छह महीने में ही बड़े बदलाव देखने को मिले। अपराध नियंत्रित हुआ। पुलिसिंग बेहतर हुई। पुलिस के व्यवहार और कार्यशैली में भी सुधार आया।
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50 फीसदी कम हुईं हत्याएं, लूट में भी कमी
लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद हत्या की वारदात में तकरीबन 50 फीसदी की कमी आई है। राजधानी लखनऊ में 2019 में 64 हत्याएं हुईं थीं जबकि 2020 में ये संख्या 38 रह गई। वहीं नोएडा में पिछले साल 52 हत्याएं हुईं, इस साल 37 केस हत्या के दर्ज हुए। इसके अलावा लखनऊ में पिछले साल 163 लूट की घटनाएं हुई थीं, जो इस साल 38 ही हैं। नोएडा में भी लूट की घटनाएं 50 फीसदी कम हुई हैं। ये आंकडे़ कमिश्नरी लागू होने के बाद 15 जनवरी से 15 जुलाई तक के हैं। 

 
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महिला अपराध पर भी लगा अंकुश 
राजधानी लखनऊ में पिछले साल 48 दुष्कर्म के मामले आए थे। इस साल 32 ऐसी घटनाएं हुईं। नोएडा में पहले 54 और इस साल आधे से भी कम 21 दुष्कर्म के केस दर्ज किए गए। इसी तरह राजधानी में छेड़खानी की घटनाओं में 50 फीसदी की कमी आई है। पिछले साल जहां 1541 वारदात हुईं थीं, वहीं इस साल 878 मामले सामने आए हैं। कानपुर में महिला अपराध चरम पर है। वूमेन पावर हेल्पलाइन के आंकड़ों के मुताबिक हर दिन तकरीबन 35 महिलाओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं हो रही हैं। 

इन मामलों में भी कमी आई
जघन्य अपराधों के अलावा चोरी, बलवा और वाहन चोरी की घटनाओं में भी कमी आई है। लखनऊ में पिछले साल 480 चोरी हुईं, जबकि इस साल 187 चोरियां हुईं। पिछले साल 1069 वाहन चोरी हुए थे, इस बार महज 476 वाहन चोरी हुए। बलवा के मामले पिछले साल 61 थे और इस साल 32 ही हैं। कुछ यही हाल नोएडा का भी रहा है। 

पीड़िताओं के लिए यह नया प्रयोग रहा सफल
कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद लखनऊ और नोएडा में महिला सुरक्षा को लेकर नया प्रयोग किया गया। दुष्कर्म पीड़िता व छेड़छाड़ पीड़िता की मदद के लिए हर समय एक पुलिस वाले की जिम्मेदारी तय की गई। पीड़िताओं के पास उनका नंबर होता है। इससे आरोपी अगर अपराध दोहराने का प्रयास करते हैं तो उन पर नकेल कसी जा सकती है। लखनऊ में 287 पीड़िताओं को कवर किया गया है। 
(आंकडे़ 15 जनवरी से 15 जुलाई 2019 और 15 जनवरी से 15 जुलाई 2020 के हैं।)
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