शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण की लागत 50 फीसदी कम हो सकती है। इस पर गुरुवार को अलग-अलग टेक्निकल इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट ने चर्चा की और तमाम सुझाव भी दिए।
अब कम लागत का आवासीय मॉडल बनाया जाएगा। इसका प्रजेंटेशन 31 दिसंबर को एचबीटीआई में होगा। टॉप 6 मॉडल को पहले, दूसरा और तीसरे पुरस्कार के रूप में 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
लो कॉस्ट हाउसिंग मॉडल फॉर अरबन (शहरी) और रूरल (ग्रामीण) क्षेत्र की एक दिवसीय कार्यशाला गुरुवार को एचबीटीआई ऑडिटोरियम में हुई। इसका उद्घाटन निदेशक प्रो. अशोक कुमार ने किया।
आर्किटेक्चर कॉलेज के डीन प्रो. जगवीर सिंह का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जमीन की कीमत ज्यादा है, फिर भी अच्छी डिजाइन और कम मैटेरियल के इस्तेमाल से सस्ता और मजबूत आवास बनाया जा सकता है।
जो व्यक्ति आवास में रहे, उसे बेहतर वेंटीलेशन मिले और प्राकृतिक सुविधा-संसाधनों का इस्तेमाल कर सके, इसकी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर खास फोकस होना चाहिए। बीम, दीवार, स्ट्रक्चर और पिलर निर्माण पर मनमाना मैटेरियल खर्च किया जाता है।
बेहतरीन डिजाइन और आर्किटेक्चर से इसका इस्तेमाल कम किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बांस, लकड़ी और मिट्टी की मदद से आवास बनाने का सुझाव दिया।
साथ ही कहा गया कि अच्छे आर्किटेक्चर से पक्के मकान की कीमत भी पचास फीसदी कम की जा सकती है। इस मौके पर प्रो. सुनील कुमार, प्रो. पृथ्वी पति, डॉ. प्रदीप कुमार त्रिपाठी और डॉ. डीएल परमार ने भी एक्सपर्ट तथ्य सामने रखे।
सीएम की पहल पर हुई कार्यशाला
मुख्यमंत्री की पहल के बाद प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने कार्यशाला का आयोजन कराया। प्रमुख सचिव ने कहा कि जो मॉडल स्वीकार होगा, उसी आधार पर डॉ. राम मनोहर लोहिया शहरी, ग्रामीण आवास योजना के मकान बनाए जाएंगेे।