शिवली। औनहां में करीब 42 बीघे में फैली मघई झील में फिर से कमल खिलेंगे। वन विभाग ने झील का पुराना स्वरूप लौटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
औनहां में पांच एकड़ में फैले इंदिरा गांधी वन चेतना पार्क के ठीक सामने 42 बीघे की मघई झील है। इस झील की पहचान कभी कमल के फूल से होती थी। आसपास के गांवों के ग्रामीण कमल गट्टा, मखाना तैयार करते थे। फिलहाल झील जलकुंभी भरी पड़ी है।
मछली पालन के चक्कर में यहां कमल के फूल खत्म हो गए। बदहाल झील के सौंदर्यीकरण के लिए प्रोफेसर एसपी सिंह ने पूर्व में बंधे तोड़ो आंदोलन चलाया था। अब वन विभाग ने झील का पुराना स्वरूप लौटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
झील से नदारद हुए विदेशी पक्षी
मघई झील डेढ़ दशक पूर्व तक सर्दी के मौसम में विदेशी पक्षियों के कलरव से गुलजार रहती थी। झील की बदहाली के साथ विदेशी पक्षियों ने भी यहां से मुंह मोड़ लिया। पक्षियों को देखने के लिए कानपुर व आसपास से भी लोग यहां पहुंचते थे। अब देशी बगुला, सवन आदि ही कुछ पक्षी दिखाई पड़ते हैं।
मघई झील व इंदिरा गांधी पार्क की बदहाली दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। स्वीकृत मिलते ही मघई झील का पुराना स्वरूप वापस किया जाएगा। - एके द्विवेदी, डीएफओ