इस मशीन की हैकिंग या री-प्रोग्रामिंग नहीं हो सकती है। मशीन को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बंगलूरू और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद में तैयार किया गया है। इस मशीन के कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट आपस में संवाद करने में सक्षम हैं। यदि बाहर से कोई कंट्रोल यूनिट या बैलेट यूनिट लगाई जाएगी, तो इसमें डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं होंगे और सिस्टम काम करना बंद कर देगा।
सबसे पहले 1998 में हुआ था ईवीएम का उपयोग
ईवीएम बनाने का विचार सबसे पहले 1977 में आया था। नवंबर 1998 में इसका उपयोग किया गया था। ईवीएम मार्क 1 का निर्माण 1989 से 2006 तक हुआ था। दूसरी पीढ़ी के ईवीएम मार्क-2 का निर्माण 2006 से 2012 तक हुआ। अब 2024 की ईवीएम मार्क-थ्री मशीन लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।