लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के तहत पहली जून यानि शनिवार को जब पूर्वांचल में मतदान हो रहा होगा तो प्रधानमंत्री के संसदीय सीट काशी के साथ ही उससे लगी मिर्जापुर सीट पर भी लोगों की निगाहें होंगी। मिर्जापुर से लगातार तीसरी बार किस्मत आजमा रहीं अनुप्रिया पटेल कामयाबी की हैट्रिक लगा पाएंगी या बड़ी बहन पल्लवी पटेल के विद्रोह से नुकसान उठाना होगा, उस पर देश के साथ ही कन्नौज के बाशिंदों की भी निगाह लगी हैं।
कन्नौज और मिर्जापुर के बीच करीब 400 किलोमीटर की दूरी है। खास बात यह है कि दोनों ही गंगा के किनारे बसे हैं। मिर्जापुर सीट से तीसरी बार मैदान में उतरीं अनुप्रिया पटेल के पिता और अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल मूलरूप से इत्र नगरी कन्नौज से थे। उनका जन्म यहां तालग्राम ब्लॉक के बगुलिहाई गांव में हुआ था। बाद में उन्होंने कन्नौज के मंडल मुख्यालय कानपुर को अपनी कर्मभूमि बना लिया, लेकिन कन्नौज से लगाव बना रहा। वर्ष 2009 में सड़क हादसे में उनके निधन के बाद से उनके परिवार का अपने गांव से लगाव कम होता गया। हालांकि उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद गांव जरूर पहुंची थीं। गांव में रह रहे परिवार के लोग डॉ. सोनेलाल पटेल की बनाई हुई सियासी पार्टी अपना दल में हुई फूट से आहत जरूर दिखते हैं, लेकिन खुलकर कुछ कहते नहीं हैं। दोनों बहनों पल्लवी पटेल और अनुप्रिया पटेल के बीच चल रहे सियासी टकराव पर परिवार के लोग कुछ बोलने से बचते दिखते हैं। गांव के लोगों की निगाह पहली जून को होने वाले मतदान पर लगी हुई है।
प्रतिमा नहीं हो सकी स्थापित, सामुदायिक भवन बना
अपने पिता डॉ. सोनेलाल पटेल की याद को जिंदा रखने के लिए उनकी बेटी व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने तीन साल पहले यहां पिता की प्रतिमा बनवाने की बात कही थी। वह बाकायदा यहां अपने पति के साथ पहुंचीं थीं। हवन-पूजन भी हुआ था। नींव डाली गई थी। हालांकि प्रतिमा अब तक नहीं बन सकी है। हालांकि अनुप्रिया पटेल के पति व प्रदेश सरकार में मंत्री आशीष पटेल की विधायक निधि से गांव में सकरवाना हनुमान मंदिर के पास डॉ. सोनेलाल पटेल के नाम से सामुदायिक भवन बनवाया गया है। तीन साल पहले 17 अक्टूबर 2021 को उनकी पुण्यतिथि पर उसका लोकार्पण किया गया था। गांव में अब डॉ. सोनेलाल पटेल के भतीजे सुशील और धर्मेंद्र रहते हैं। दो भतीजे अजय और संजय पास के ही तालग्राम कस्बा में रहते हैं। बाकी लोग कानपुर में रहते है। भतीजे धर्मेंद्र बताते हैं कि केंद्र में मंत्री बनने पर बहन अनुप्रिया आई थीं। चाची कृष्ण पटेल पारिवारिक कार्यक्रम में आती रहती हैं।
अनुप्रिया को प्रतिद्वंदियों के साथ ही बड़ी बहन से भी मिल रही है चुनौती
पार्टी में वर्चस्व को लेकर परिवार में पड़ी फूट का असर यह हुआ कि पार्टी में दरार पड़ गई। पिता डॉ. सोनेलाल पटेल के बनाए अपना दल पर छोटी बहन अनुप्रिया पटेल ने अधिकार जताकर उसे नया नाम अपना दल (सोनेलाल) नाम दिया। जबकि उनकी मां कृष्णा पटेल अपना दल (कमेरावादी) की मुखिया हैं। अनुप्रिया की बड़ी बहन पल्लवी पटेल कौशांबी की सिराथू सीट से सपा के टिकट से विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने इस सीट से प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को हराया था। पल्लवी पटेल अपनी मां की अगुआई वाली पार्टी में सक्रिय हैं। इस चुनाव में उन्होंने सपा से किनारा करके अलग गठबंधन बनाकर उसे पीडीएम का नाम दिया है। मिर्जापुर में अपनी छोटी बहन के सामने उन्होंने अपनी पार्टी से दौलत सिंह पटेल को मैदान में उतारा है। मिर्जापुर से 10 प्रत्याशियों के बीच होने वाली लड़ाई में सभी की निगाहें दोनों बहनों पर लगी हैं।