कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए अजय कपूर को स्वामी प्रसाद मौर्य की एमएलसी सीट मिल सकती है। अजय कपूर को भाजपा ने इस सीट का आश्वासन दिया है। अपनी पार्टी बनाकर स्वामी प्रसाद ने सपा और एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है।
लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले अजय कपूर के भाजपा में जाने पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच दिल्ली से छनकर आई चर्चा में कहा जा रहा कि अजय कपूर को भाजपा एमएलसी बना सकती है।
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वैसे तो दो दिन पहले ही एमएलसी चुनाव पूरा हुआ है, पर सपा से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने एमएलसी पद से भी इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने अजय कपूर को इसी सीट पर एमएलसी बनाने का आश्वासन दे रखा है।
अजय कपूर के भाजपा में शामिल होने की जैसे ही खबर महानगर पहुंची, उन्हें लेकर तरह-तरह चर्चाएं होने लगीं। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया के जरिये यह कहना शुरू कर दिया कि चुनाव के समय भाजपा में शामिल होने की वजह से संभावना है कि उन्हें महानगर लोकसभा सीट से भाजपा का प्रत्याशी बना दिया जाए।
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इसी तरह एक और चर्चा यह रही कि अजय कपूर के भाजपा में जाने से अब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को महानगर सीट से प्रत्याशी बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कहा जा रहा है कि महाना की ओर से महानगर सीट पर दावेदारी करने के समय पार्टी की ओर से यह तर्क रखा गया था कि कांग्रेस से जब अजय कपूर आ जाएंगे तो ऐसे में पंजाबी वोटों का बंटवारा हो सकता है।
अब जबकि अजय कपूर भी भाजपाई हो गए हैं तो वोट बंटने के सवाल पर विराम लग गया है। अजय कपूर को भाजपा में शामिल होने से पहले प्रदेश इकाई से क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल से भी उनके विषय में जानकारी ली गई थी। क्योंकि अजय कपूर तीन बार के विधायक रहे हैं
इस वजह से क्षेत्रीय इकाई ने उनकी जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहा गया कि अजय कपूर के भाजपा में आने से पार्टी का जनाधार बढ़ेगा। क्षेत्रीय इकाई की सहमति मिलते ही उनको भाजपा में शामिल करने की हरी झंडी मिल गई।
भाजपा का जनाधार और बढ़ेगा
अजय कपूर तीन बार के विधायक रहे हैं, कांग्रेस में वह जनाधार वाले नेता रहे हैं। भाजपा में उनके आने से पार्टी का जनाधार बढ़ेगा। -प्रकाश पाल क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा
चार दिन पहले कांग्रेस के पैनल में महानगर सीट से प्रत्याशी थे अजय कपूर
आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी की प्रदेश इकाई ने चार दिन पहले अजय कपूर का नाम कानपुर महानगर सीट से प्रत्याशी के पैनल में रखकर केंद्रीय कमेटी को भेजा था, बुधवार को उनके भाजपा में आ जाने से कांग्रेस के साथ ही गठबंधन इंडिया को भी तगड़ा झटका लगा है। यह भी कहा जा रहा है कि दो दिन बाद कांग्रेस की केंद्रीय इकाई महानगर सीट से अपना प्रत्याशी घोषित करने के लिए बैठक करने वाली थी, जिसमें प्रत्याशी के रूप में अजय का नाम सबसे ऊपर था।
महानगर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सभा सीटें आती हैं। आर्यनगर, सीसामऊ, छावनी, किदवई नगर और गोविंदनगर। इसमें से शुरू की तीन विधानसभा सीटों पर वर्तमान में सपा के विधायक हैं, जबकि बाद की दो सीटों पर भाजपा काबिज है। एक तरफ सपा के तीन विधायक और कांग्रेस-सपा का गठबंधन ऐसे में दोनों विपक्षी दलों के बीच इस बार चुनाव को लेकर काफी उत्साह दिख रहा था। जीत किसकी होगी इसके बजाए गठबंधन की पार्टियां अबकी भाजपा को कड़ी टक्कर देने के इरादे से तैयारी में जुटी थी। अचानक इस नए घटनाक्रम की वजह से दोनों पार्टियों को सकते में ला दिया।
अजय कपूर लगातार तीन बार विधायक रहे। जिसमें उन्हें दो बार गोविंदनगर सीट से लड़ने का मौका मिला और तीसरी बार किदवई नगर से जीत हासिल किया। पिछले दो बार 2017 और 2022 से वह भाजपा से हारते आ रहे हैं, फिर भी उनको 2017 में 77,424 और 2022 में 76351 वोट हासिल हुए। इन दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी लगातार तीसरे स्थान पर बनी रही है। अजय के भाजपा में जाने के बाद वोट के आंकड़ों को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि सपा, कांग्रेस दोनों पार्टियां इस बदलाव से काफी कमजोर हो सकती हैं।
अजय के भाजपा में जाने के साथ ही कांग्रेस के पैनल में शामिल बाकी दोनों नेता आलोक मिश्रा और पवन गुप्ता की सक्रियता बढ़ गई है। लेकिन यह दोनों अजय कपूर के भाजपा में जाने को लेकर बहुत खुश नहीं हैं। जाहिर सी बात है कि यदि इनमें से किसी को टिकट मिलता तो उसे अजय कपूर के जनाधार का फायदा जरूर होता। इस बीच कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नौशाद आलम मंसूरी को अभी भी भरोसा है कि अजय कपूर फिर से कांग्रेस में वापस आ सकते हैं, क्योंकि जो सम्मान उन्हें कांग्रेस में मिला है, वह भाजपा में नहीं मिल सकता है।