साक्षी महाराज (भाजपा), अरुण शंकर शुक्ल (गठबंधन) और अन्नू टंडन (कांग्रेस)
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भाजपा और कांग्रेस के बीच मानी जा रही चुनावी लड़ाई को गठबंधन ने त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। मोदी लहर में 2014 में जीती भाजपा वोट बैंक में बिखराव से जूझ रही है तो 2009 में रिकॉर्ड मतों से जीतने वाली कांग्रेस फिर मोदी फैक्टर और गठबंधन से। नतीजे कुछ भी हों, लेकिन इस बार एकतरफा मतदान के आसार नहीं हैं। पिछले चुनाव में सपा-बसपा अलग-अलग लड़े और 4 लाख से अधिक मत हासिल किए। इस बार दोनों साथ हैं। इससे चुनावी समीकरण बदल भी सकते हैं।
गठबंधन ने यहां अरुण शंकर शुक्ल उर्फ अन्ना महाराज को चुनाव मैदान में उतारा है। प्रमुख दलों में अकेले ब्राह्मण प्रत्याशी होने और सपा-बसपा के वोट बैंक के सहारे वे कड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। वहीं, भाजपा ने मौजूदा सांसद साक्षी महाराज पर ही भरोसा जताया। साक्षी पिछड़ा वर्ग से अकेले प्रत्याशी हैं। भाजपा मोदी लहर और राष्ट्रवाद के मुद्दे के सहारे चुनावी लड़ाई आसान मान रही है।
हालांकि, भाजपा का परंपरागत सवर्ण वोट बैंक में गठबंधन प्रत्याशी की सेंधमारी और मुस्लिम मतदाताओं में गठबंधन को लेकर रुझान उसकी चिंता बढ़ाए हुए है। कांग्रेस ने लगातार तीसरी बार अन्नू टंडन को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस अन्नू के ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों, बीमारों व अग्नि पीड़ितों की सहायता को देखते हुए जीत की उम्मीद कर रही है। हालांकि मुस्लिम व सवर्ण वोटरों में बिखराव से चिंता बढ़ी हुई है। पिछली बार भी इन्हीं तीनों प्रमुख प्रत्याशियों में लड़ाई थी।