स्लाटर हाउसों पर पिछले दिनों हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद मांस व्यापारियों की सोमवार को बंदी के ऐलान का साफ प्रभाव मछली और मीट मार्केट पर दिखाई दिया। बंदी के चलते मीट बाजार 80 प्रतिशत तो मछली व्यापार 40 प्रतिशत तक प्रभावित रहा। सोमवार को कानपुर की अधिकतर मीट की दुकानें बंद रहीं। वहीं, कुछ दुकानों में चोरी छिपे मीट बिकता दिखाई दिया। इसी तरह मछली बाजार भी मंदा रहा।
अमर उजाला द्वारा इस मामले की पड़ताल की गई। बकर मंडी में एक भी बकरा बिकता नहीं दिखा। यहां सयापा छाया रहा। बकरमंडी के सदर हाजी कमर साहब ने बताया कि व्यापारियोें की बंदी एक तरह से जायज है। स्लाटर हाउसों को बंद करने के पहले सरकार को आम व्यापारियों को समय देना चाहिए था।
यहीं के आढ़तिया मो. हसन ने बताया कि प्रदूषण की वजह से बकरमंडी का स्लाटर हाउस बंद किया गया है। कहा कि छोटे मीट विक्रेताओं को लाइसेंस देने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। जिनके लाइसेंस हैं उनके रिन्यूअल नहीं हो रहे हैं। बकरमंडी से हर सप्ताह करीब एक हजार बकरों की बिक्री होती थी, पर बंदी के चलते सोमवार को यहां से दस बकरे भी नहीं बिक सके।
डेमो
वहीं, उन्होंने पुलिस के बकरों से लदे ट्रक को न आने देने की भी शिकायत की। कहा कि इससे आम व्यापारी खासा परेशान है। मीट का बाजार करीब 80 प्रतिशत तक प्रभावित है। वहीं, चमनगंज समेत अधिकतर क्षेत्रों में मीट की दुकानें आधे शटर लगाकर चलती दिखीं। एक विक्रेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उनके एसोसिएशन ने बंदी का आह्वान किया है। पर बच्चों को भी पालना है। दुकान बंद कर देंगे तो खाएंगे क्या।
उधर, मछली बाजार भी ठंडा दिखा। फिश मर्चेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. फैय्याज ने बताया कि सोमवार को उनकी मंडी में 40 प्रतिशत तक कम फुटकर व्यापारी आया। इससे व्यापार भी इसी के सापेक्ष कम रहा। बताया कि अधिकतर फुटकर विक्रेता के पास लाइसेंस नहीं हैं। इन्हें लाइसेंस बनवाने के लिए कहा गया है।
बताया कि मछली की इस थोक मंडी से हर रोज करीब 20-25 टन माल की खपत होती थी। पर बंदी के चलते सोमवार को यह खपत 12 से 14 टन के आस पास रही। उन्होंने भी नाकों पर पुलिस के माल न आने देने की शिकायत की। आढ़तिया शबाब अहमद ने कहा कि इस मंडी में कालपी, सिंकदरा , हमीरपुर, औरैया, बांदा, चिल्ला आदि जगहों से मछली की निर्बाध आपूर्ति होती है। पर सोमवार को आया अधिकतर माल खराब हुआ। इससे परेशानी बढ़ गई है।