कोरोनावायरस और लॉकडाउन के बाद दूसरे शहर में गुजर बसर करना मुश्किल हुआ तो घर के लिए निकल पड़े। घर की देहरी तक पहुंचने से पहले ही दो प्रवासी लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
बहराइच के रानीगंज थाना अंतर्गत मकसूद पुर गांव का रहने वाला खुशबुद्दीन (16) कुछ माह पूर्व चाचा इकबाल और भाई सलाउद्दीन के साथ नौकरी की तलाश में मुंबई गया था। 23 मार्च को लॉकडाउन होने पर तीनों फंस गए थे। जमापूंजी खत्म हो गई तो 14 अप्रैल को तीनों ट्रक में सवार होकर घर के लिए चल दिये।
सलाउद्दीन ने बताया कि शनिवार शाम रास्ते में छोटे भाई खुशबुद्दीन को तेज बुखार आया था। एक स्थान पर गाड़ी रुकी तो उसे दवा लाकर दी थी लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। देर रात ट्रक चालक ने उसे कानपुर के रामादेवी चौराहे पर उतार दिया।
इसके बाद पास के निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर न होने की बात कहकर स्टाफ ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद किसी तरह ई-रिक्शा से भाई को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे। इस बीच रास्ते मे उसे उल्टी हुई और उसकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। किशोर को कोरोना संदिग्ध मानते हुए उसका सैंपल लिए जाने की बात कहकर पुलिस ने शव को हाथ तक नहीं लगाया। पुलिस का कहना है कि मेडिकल टीम बुलाई गई है।
वहीं दूसरी घटना कन्नौज जिसे से है। यहां मुम्बई से लौट रहे वृद्ध की रास्ते में ही मौत हो गई। 60 वर्षीय वृद्ध 12 मई को मुंबई से दो भांजों के साथ ट्रक से अपने घर हरदोई लौट रहा था। कन्नौज के जीटी रोड स्थित हरदोई मोड़ पर ट्रक ने सवारियों को उतार दिया। वृद्ध ने भांजों से खाना मांगा।
भांजे फल की ठेली देखकर फल खरीदने पहुंचे तो वृद्ध को अचानक चक्कर आ गया। जिसके बाद उसने तड़पकर दम तोड़ दिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मृतक हरदोई के थाना सांडी स्थित सैतियापुर निवासी था।