कोरोना संकट में चावल कारोबारियों के लिए लॉकडाउन का दौर भारी पड़ रहा है। बाजार में पुलाव वाले (बासमती, सेला) चावल की बिक्री धड़ाम हो गई है। ऐसा होटल, रेस्टोरेंट्स, ढाबा, फास्ट फूड, बिरयानी की दुकानों की बंदी और शादी समारोह न होने से हुआ है। अकेले कलक्टरगंज किराना मंडी से रोजाना करीब 30 हजार किलो सेला चावल की बिक्री ठप है। इससे इस बाजार के चावल कारोबार को प्रतिदिन करीब 15 से 20 लाख रुपये की चपत लग रही है।
फ्राइड राइस, बिरयानी के साथ अधिकतर होटलों व ढाबों में सेला चावल व शादी समारोहों में पुलाव का चावल प्रयोग में लाया जाता है। शहर में करीब 2000 बिरयानी की दुकानें और फास्ट फूड के ठेले, काउंटर लगते हैं। आम दिनों में एक-एक दुकान पर रोजाना करीब 10-15 किलो तक सेला/ पुलाव वाले चावल की खपत हो जाती है। लॉकडाउन में ये सभी दुकानें बंद हैं। जिसका सीधा प्रभाव कारोबार पर पड़ा है।
व्यापारियों की बात
अकेले कलक्टरगंज बाजार से रोजाना 1200 से 1300 चावल की बोरियों की बिक्री होती थी। वर्तमान में मुश्किल से 70 से 80 बोरी ही बिक रही हैं। कारोबार ठप होने से व्यापारियों का पैसा फंस गया है। चावल उत्पादक किसान भी मांग न होने से परेशान हैं। बाजार को रोजाना लाखों रुपये की चोट पहुंच रही है। -
आशीष मिश्रा, अध्यक्ष, कलक्टरगंज उद्योग व्यापार मंडल
पहले से ही बाजार में मंदी थी। खानपान की दुकानों की बंदी के बाद चावल की बिक्री न के बराबर रह गई है। जिन दुकानदारों को उधार माल दिया था, वहां पेमेंट भी फंस गया है। मांग न होने पर किसान फसल की कीमत कम करेंगे। और जिन व्यापारियों ने महंगे भाव पर चावल खरीद लिया है, उन्हें दोहरी चोट लगेगी।
- बबलू जायसवाल, चावल कारोबारी, कलक्टरगंज
शादी समारोहों में अच्छी खपत की उम्मीद में कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में सेला और पुलाव का चावल खरीद लिया था। अब जब तक यह स्टॉक क्लियर नहीं होता व्यापारियों के सामने आर्थिक तंगी बनी रहेगी। महीने भर बंदी और चली तो व्यापारियों को आधी कीमत पर माल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। क्योंकि किसान कम कीमत पर माल बेचना शुरू कर देंगे। फुटकर बिक्री ठप होने का भी बाजार पर असर है।
- विशाल अग्रवाल, गल्ला कारोबारी
रमजान के दिनों में बिक्री में थोड़ी कमी आती है जिसकी भरपाई शादी समारोहों से हो जाती थी। लॉकडाउन के कारण सामान्य बिक्री भी ठप है। मांग न होने से चावल की कीमतें भी स्थिर हैं। सेला चावल घरों में इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए व्यापारियों के पास माल ठंप पड़ा है। व्यापारी और किसान दोनों परेशान हैं।
- शुभम गुप्ता, गल्ला व्यापारी
एक नजर आंकड़ों पर
शहर में करीब दो हजार बिरयानी, फास्ट फूड की दुकानें लगती हैं। इनमें औसतन 10 से 15 किलो चावल की खपत होती है। इस लिहाज से करीब 20 से 30 हजार किलो चावल इन्हीं दुकानों में लगता है। बाकी करीब 10 से 20 हजार किलो चावल शादी समारोह, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों में इस्तेमाल होता है। यह चावल 50 से 70 रुपये किलो है। एक बोरी में 25 किलो चावल होता है। 1200 बोरियों की बिक्री अटकने से 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से सिर्फ कलक्टरगंज बाजार को ही रोजाना करीब 15 लाख रुपये की चोट पहुंच रही है। शहर की अन्य गल्ला मंडियों में भी बिक्री ठप होने से यह आंकड़ा 30 से 35 लाख रुपये तक पहुंच गया है।