औरैया में 55 बसों से करीब साढ़े तीन हजार लोग आए। इन्हें लाने के लिए दिल्ली के यूपी बार्डर पर 55 बसें लगाई गई थीं। 35 बसें फिर भेजी गई हैं। फतेहपुर में आठ बसों से लोग पहुंचे। बाईपास पर ही शुरुआती जांच की गई।
बिहार के 15 मजदूरों को आगे भेजने की व्यवस्था की गई। उन्नाव जिले में भी 31 बसें आनंद विहार भेजी गई थीं, जिनमें 29 बसें यात्रियों को लेकर लौटीं। पैदल पहुंचने या उन्नाव से गुजरने वालों की संख्या भी खासी बड़ी रही। उन्नाव के एआरटीओ ने गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, बलरामपुर, प्रतापगढ़, औरैया, इटावा, कुशीनगर, इलाहाबाद सहित कुछ जिलों के लिए विशेष बसों से लोगों को भेजने का प्रबंध कराया।
क्या ट्रक, क्या ट्राला, जो दिखा-मान लिया सहारा
सेंट्रल यूपी और बुंदेलखंड के जिलों में दिल्ली या दूसरे राज्य से घर वापसी की कोशिशों में लगे लोग रोडवेज बसों पर ही निर्भर नहीं रहे। जल्द से जल्द घर पहुंचने की बेताबी में कोई रसोई गैस सिलिंडर ढोने वाले ट्रकों पर चढ़ गया तो कई ने मालवाहक वाहनों पर लटककर भी यात्रा की। बसों पर ट्रकों की छतों पर बेशुमार भीड़ के नजारे उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर, कन्नौज के मुख्य मार्गों पर रविवार को खूब देखे गए।
कानपुर देहात में हाथ पर बांधा लाल रिबन
कानपुर देहात में बाहर से लौटने वाले लोगों को दूसरों से अलग रखने के लिए परिषदीय स्कूल और पंचायत भवन में ठहरने की व्यवस्था की गई है। बाहर से आए सभी लोगों की बांह पर लाल रिबन बांधा गया है ताकि इन्हें देखकर अन्य लोग 14 दिन तक दूरी बनाए रखें।