महिलाओं के दिल में सुलग रही शराब से नफरत की चिंगारी ने शराब के कारोबार में आग लगा दी है। अकेले कानपुर में हालत यह है कि तीन सौ शराब की दुकानों में विरोध के कारण ताला लग गया है। इससे हर रोज करीब दो करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। आबकारी अधिकारी देवराज सिंह ने पूरे मामले से जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को अवगत कराया है।
जिले में अंग्रेजी, देशी शराब और बीयर की 720 दुकानें थीं। सुप्रीम कोर्ट के शराब की दुकानों को हाईवे से पांच सौ मीटर दूर करने के आदेश से जिले की 260 दुकानें प्रभावित हुई। इस पर 42 शराब की दुकानों के लाइसेंस सरेंडर कर दिए गए। बाकी की ज्यादातर दुकानें शिफ्ट होने की प्रक्रिया शुरू होते ही पब्लिक का विरोध शुरू हो गया। यह विरोध शिफ्ंिटग वाली दुकानों तक ही सीमित न रहकर पुरानी दुकानों पर भी गाज बनकर गिरा।
आबकारी अधिकारी ने बताया कि बची हुईं 460 दुकानों में से करीब तीन सौ दुकानों पर पब्लिक के विरोध के कारण ताला लग गया है। मारपीट, तोड़फोड़ और लूट की घटनाओं से सेल्स मैन ने दुकानें खोलने से इनकार दिया है। आबकारी अधिकारी का कहना है कि जिले की 720 दुकानों में से 160 ही दुकानें खुल रही हैं। बची हुई 560 दुकानों में से 42 दुकानदारों से लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन और पब्लिक के विरोध के कारण 518 दुकानों पर ताला लग गया है।