कानपुर देहात। कानपुरनगर के चौबेपुर क्षेत्र के गढ़ेवा में वर्ष 2010 में किशोरी की जलाकर हत्या करने के मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक में चल रही थी। बुधवार को अदालत ने हत्या के मामले में पारिवारिक महिला को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया है।
चौबेपुर के गढ़ेवा निवासी मोहम्मद रहीश ने चार अगस्त 2010 को पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि मुकदमे की तारीख में वह पत्नी बेबी बेगम के साथ कानपुर कचहरी गया था। घर पर 13 वर्षीय बेटी अकेली थी। इसका फायदा उठाकर पड़ोस में रहने वाले पारिवारिक भतीजे सम्मो के लड़के मुश्ताक का साला परियल उन्नाव निवासी गुलगुले उर्फ मुश्तकीम, सम्मो की पत्नी मुनीरन व बहू रेहाना उसके घर पहुंच गए।
आरोप लगाया था कि इन लोगों ने बेटी को गुलगुले उर्फ मुश्तकीम के साथ भाग जाने के लिए कहा। मना करने पर मुनीरन ने कटोरे में लिया मिट्टी का तेल बेटी पर उड़ेल कर आग लगा दी। बेटी के चिल्लाने पर पड़ोस में रहने वाली उसकी चाची व दादी को आता देख आरोपी मौके से भाग गए। बेटी को दादी ने अस्पताल भर्ती कराया जहां उसकी उपचार के दौरान बेटी की मौत हो गई।
पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुनीरन, गुलगुले उर्फ मुश्तकीम व रेहाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक जज सुरेंद्र सिंह की कोर्ट में चल रही थी। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में बचाव व अभियोजन पक्ष में बहस हुई।
बचाव पक्ष ने आरोपियों को रंजिशन फंसाने का तर्क दिया जिसका अभियोजन ने विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी मुनीरन को दोष सिद्ध करते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास काटना होगा। वहीं मृतका के मृत्युकालिक बयान व साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी गुलगुले उर्फ मुस्तकीम व रेहाना को दोषमुक्त कर दिया।